
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों की जेब काटने वाले ‘कमीशन खेल’ पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ा रुख (Private School Affiliation Code) अपनाया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने एक सख्त निर्देश जारी करते हुए जिले के सभी निजी स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन तय कर दी है।
अब किसी भी स्कूल के लिए अपनी पहचान छिपाना मुमकिन नहीं होगा। स्कूलों को अपने मुख्य द्वार और सूचना पटल पर अपनी संबद्धता (Affiliation) और मान्यता कोड स्पष्ट रूप से लिखना होगा। यह कदम उन स्कूलों की पोल खोलने के लिए उठाया गया है जो छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता लेकर सीबीएसई (CBSE) के नाम पर पालकों से भारी-भरकम फीस वसूल रहे हैं।
दुकान और सामान की बाध्यता अब पूरी तरह खत्म (Private School Affiliation Code)
अक्सर देखा जाता है कि स्कूल संचालक अभिभावकों को किसी खास दुकान से ही किताबें, यूनिफॉर्म और जूते खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। डीईओ के नए आदेश ने इस एकाधिकार (Monopoly) को खत्म कर दिया है।
अब कोई भी स्कूल या दुकानदार किसी पालक को ‘पूरा सेट’ खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर पाएगा। अभिभावक अपनी जरूरत के हिसाब से एक या दो किताबें भी खरीद (Private School Affiliation Code) सकेंगे। साथ ही, स्कूल अब डिक्शनरी, एटलस या आर्ट-क्राफ्ट जैसी अनावश्यक सामग्री को कोर्स में जोड़कर सेट की कीमत नहीं बढ़ा पाएंगे।
ड्रेस और बैग पर नहीं होगा स्कूल का नाम
अभिभावकों के लिए एक और बड़ी राहत यह है कि अब स्कूल के बैग, कॉपी या कवर पर स्कूल का नाम छपवाना प्रतिबंधित कर दिया (Private School Affiliation Code) गया है। स्कूल अब दो से अधिक तरह की यूनिफॉर्म नहीं रख सकेंगे और एक बार तय की गई ड्रेस को कम से कम 3 साल तक बदलना संभव नहीं होगा।
यदि स्कूल प्रशासन ड्रेस बदलना चाहता है, तो उसे कम से कम 6 महीने पहले इसकी सूचना देनी होगी। इन नियमों का उल्लंघन करने पर स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



