छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के बीच अब सरकार सीधे जनता के बीच पहुंचने की तैयारी (Sushasan Tihar) में है और इसी कड़ी में आज से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रदेशव्यापी दौरे का आगाज हो गया है, जिसमें वे अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करेंगे और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जमीनी हकीकत जानने की कोशिश करेंगे। इस अभियान को सरकार की फील्ड मॉनिटरिंग की बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है, जहां कागजों के बजाय सीधे जनता से फीडबैक लिया जाएगा।
हेलीकॉप्टर से रवाना होकर पहुंचे जनता के बीच (Sushasan Tihar)
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार सुबह पुलिस लाइन हेलीपेड से हेलीकॉप्टर के जरिए अपने दौरे के लिए रवाना हुए और अभियान के तहत वे विभिन्न जिलों में जाकर आम लोगों से मुलाकात करेंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आंकलन करेंगे। इस दौरान उनके साथ प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और विशेष सचिव रजत कुमार बंसल भी मौजूद हैं, जो पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
जनता से सीधे फीडबैक लेने पर जोर (Sushasan Tihar)
इस दौरे की सबसे खास बात यह है कि मुख्यमंत्री खुद लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश करेंगे कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में जमीन तक पहुंच रहा है या नहीं, साथ ही यह भी समझेंगे कि किन योजनाओं में सुधार की जरूरत है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रशासनिक स्तर पर मिल रही रिपोर्ट के साथ-साथ आम नागरिकों की राय को भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि योजनाओं को और प्रभावी बनाया जा सके।
एक मई से दस जून तक चलेगा सुशासन अभियान
प्रदेश में सुशासन तिहार 1 मई से 10 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसके तहत पूरे राज्य में जन समस्या निवारण शिविर लगाए (Sushasan Tihar) जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह बनाकर और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने की व्यवस्था की गई है और साथ ही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है।
शिविरों में तत्काल समाधान और जागरूकता पर फोकस
इन शिविरों में न केवल शिकायतों का निराकरण किया जा रहा है, बल्कि पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ देने की भी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए और हर आवेदक को उसकी आवेदन स्थिति की जानकारी भी समय-समय पर दी जाए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत हो सकें।
