खबरों की मरम्मत:खबरों की मरम्मत: कांग्रेस का आंतरिक लोकतंत्र.. झपटमार ने पुलिस कमिश्नरी की चूलें हिला दीं..

कांग्रेस का आंतरिक लोकतंत्र: कठिन है डगर पनघट की


प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस बाबा के बीच चल रहे जुबानी जमाखर्च का लब्बोलुआब यह है कि कांग्रेस का आंतरिक लोकतंत्र अभी जिंदा है। यहां पर अभिव्यक्ति की आजादी का आलम यह है कि जो भी बोला और किया जाता है, वह डंके की चोट पर होता है; फिर चाहे सत्ता से बाहर क्यों न होना पड़े। छत्तीसगढ़ कांग्रेस का जब भी राजनीतिक इतिहास लिखा जाएगा, उसमें इस बात का उल्लेख जरूर होगा कि एक बार विरासत में मिली सत्ता को तीन साल में कैसे गंवाया जा सकता है। 15 साल तक पार्टी को सत्ता से बाहर कैसे रखा जा सकता है? बंपर जनादेश की सत्ता कैसे गंवाई जाती है। और फिर, मैं नहीं तो कोई और भी नहीं” की तर्ज पर पार्टी के अंदरूनी मसलों को कैसे तमाशा बनाया जा सकता है। हालांकि इसमें कांग्रेस की मौजूदा पीढ़ी का कोई खास रोल नहीं है, लेकिन राज्य बनने के बाद उभरी राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने इतना उथलापन ला दिया कि राजनीतिक शर्मिंदगी भी शर्मा जाए। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र की खूबसूरती मानते हैं। बहरहाल अभी चुनाव को समय है, लेकिन उससे पहले लिखी जाने वाली पटकथा बता रही है कि—कठिन है डगर पनघट की।

झपटमार ने पुलिस कमिश्नरी की चूलें हिला दीं

एक वीआईपी से मोबाइल लूटने वाले एक छोटे बदमाश ने पूरी पुलिस कमिश्नरी की चूलें हिला दी हैं। मॉर्निंग वॉक के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का मोबाइल लूटकर भागने वाले बदमाश को भले ही पुलिस ने 8 घंटे के भीतर दबोच लिया हो, लेकिन इस घटना ने पूरे पुलिस सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। राजधानी में कमिश्नर प्रणाली लागू किए जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि क्राइम रेट घटेगा, लेकिन अभी तक पुलिस कमिश्नरी के तेवरों का कोई भी असर बदमाशों और लुटेरों पर नहीं दिख रहा है। हालत यह है कि अब वीआईपी सुरक्षा का नए सिरे से ऑडिट किया जा रहा है। सभी थाना प्रभारी बदमाशों की क्लास लेकर रासुका में अंदर करने की चेतावनी दे रहे हैं। जगह-जगह पुलिस तैनात की जा रही है। वैसे, पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद करीब चार माह के अरसे में राजधानी में झपटमारी और लूट के कुल 24 केस में से 20 मामलों के झपटमार पकड़े जा चुके हैं, लेकिन चार मामलों के लुटेरे आज तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। पब्लिक सवाल कर रही है कि वीवीआईपी से मोबाइल लूटने पर 8 घंटे के भीतर दबोचने वाली पुलिस की तत्परता आम आदमी से झपटमारी होने पर क्यों नहीं दिखती? अपराधी तो अपराधी है। सवाल यह भी है कि क्या अपराधियों को पकडऩे के मामले में भी अब वीआईपी कल्चर का ट्रेंड चलेगा?

सदस्यता शुल्क डेढ़ गुना… महंगाई का असर या संगठन का बंटाधार करने की एक और कड़ी…

युवा कांग्रेस के चुनाव का ऐलान हो गया है। युवा कांग्रेस चुनाव से पहले सदस्यता अभियान चलेगा। युवा कांग्रेस के सदस्यता शुल्क में भी महंगाई का असर दिखने लगा है। कांग्रेस ने युवा कांग्रेसियों से 50 की बजाय अब 75 रुपए का शुल्क लेने का ऐलान कर दिया है। सदस्यता शुल्क डेढ़ गुना करने की वजह भले ही कांग्रेस पार्टी का ज्यादा से ज्यादा फंड जुटाने का रहा हो, लेकिन जानकारों का कहना है कि इससे पार्टी का बंटाधार हो रहा है। दरअसल, सभी को पता है कि कांग्रेस हो या युवा कांग्रेस, सदस्यता पर्ची घर में बैठकर ही भरी जाती है। शुल्क भी चुनाव लडऩे वाला ही भरता है। शहर, जिला और ब्लॉक के साथ प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष का चुनाव लडऩे वाले युवा कांग्रेसी लाखों रुपए का शुल्क जमा करते हैं। इसके साथ ही युवाओं को साधने में बीयर-चिकन पार्टी से लेकर तमाम प्रपंच करने में भी रोकड़ा खर्च करना पड़ता है। चुनाव जीतने या हारने के बाद युवा कांग्रेस के पदाधिकारी खर्च किए गए रोकड़े से दोगुना वसूलने के लिए दिन-रात जोड़-तोड़ में जुटे रहते हैं। इससे संगठन के कामकाज का बंटाधार हो जाता है। फंड जुटाने के फेर में संगठन की बैंड बजाने वाले ऐसे फैसले लेने वाले कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को लोकसभा या विधानसभा चुनाव हारने पर कोई मलाल नहीं होता, क्योंकि जब तक ईवीएम है तब तक चुनाव हारने पर वजह तलाशने की जरूरत ही नहीं है। कांग्रेस नेताओं के पास ईवीएम हैकिंग का रेडीमेड बहाना पहले से है।

सिर्फ 52 फीसदी काम… फिर भी शर्म से पानी-पानी नहीं हुए अफसर

सड़कों के खस्ताहाल होने पर कई महीने पहले हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और विभाग के अफसरों से रिपोर्ट मांग ली। हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद भी अफसरों ने अक्लमंदी नहीं दिखाई। कोर्ट की फटकार के बाद भी काम में चुस्ती या फुर्ती नहीं दिखी। सालाना रिपोर्ट में पीडब्ल्यूडी का रिपोर्ट कार्ड 52 फीसदी रहा। यानी पिछले साल विभाग को मिले बजट का सिर्फ 52 फीसदी काम ही कर पाए विभागीय अफसर। आंकड़े बता रहे हैं कि पब्लिक वक्र्स डिपार्टमेंट के अफसरों ने पब्लिक को बेहतर सड़क देने में कोताही बरती है। लेकिन, 52 फीसदी रिपोर्ट के बावजूद पीडब्ल्यूडी के अफसर शर्म से पानी-पानी नहीं हो रहे हैं; क्योंकि पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग यानी पीएचई के अफसरों ने पब्लिक को पानी पिलाने के टारगेट का सिर्फ 19 फीसदी काम पूरा किया है। पीडब्ल्यूडी के अफसर छाती चौड़ी कर घूम रहे हैं और पानी वाले अफसर (पीएचई) पानी-पानी हो रहे हैं।

गजब फरमान.. किस चक्की का आटा खाते हैं आला अफसर?

शिक्षा विभाग ने फरमान जारी कर दिया है कि कक्षा 9 से 12 के स्टूडेंट्स अब घर-घर जाकर असाक्षरों को ढूंढने का काम भी करेंगे। सर्वे कार्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ छात्रों की ड्यूटी भी लगाई जाएगी। यह फरमान उस दौर में जारी हुआ है, जब खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के प्राचार्यों पर लगातार कार्रवाई चल रही है। समीक्षा बैठकों में रिजल्ट खराब होने के कारणों पर चिंतन किया जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए नई रणनीति और पूरे साल भर की एक्टिविटी की योजना बन रही है। शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि हाई स्कूल के स्टूडेंट्स अगर घर-घर जाकर असाक्षरों की तलाश और सर्वे फॉर्म भरने का काम करेंगे तो रिजल्ट कैसा आएगा, अंदाजा लगाया जा सकता है। जानकार यह सवाल भी कर रहे हैं कि शिक्षा विभाग के अफसर आखिर किस चक्की का आटा खाकर ऐसे शिक्षा विरोधी फरमान जारी करते हैं?

विष्णु देव जब बनते हैं देवों के देव महादेव

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय वैसे तो अपने नाम के अनुरूप शांत और सौम्य स्वभाव के हैं। उनकी सरलता और सहजता के उनके विरोधी भी कायल हैं। किंतु जब बात सुशासन की आती है तो इसमें कोताही बरतने वाले दुशासनों के लिए वे देवों के देव महादेव बनकर अपना त्रिनेत्र खोल देते हैं। प्रदेश में इन दिनों सुशासन तिहार चल रहा है। इस भीषण गर्मी में मुख्यमंत्री खुद कभी भी किसी जनसमस्या निवारण शिविर में पहुंच जाते हैं। चिलचिलाती धूप में किसी पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर लोगों की फरियाद सुनते हैं। शासकीय योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन की वस्तुस्थिति से अवगत होते हैं और जैसे ही किसी अधिकारी या कर्मचारी की कोताही की शिकायत सामने आती है, तत्काल उसके खिलाफ कार्रवाई करते हैं। प्रदेश में खाद संकट को लेकर मिली शिकायतों पर उन्होंने रौद्र रूप दिखाया और हाथ के हाथ दो अधिकारियों को निलंबित कर नौकरशाही को यह संदेश दे दिया कि वे स्वभाव से जितने सरल, सहज और सौम्य हैं, उतने ही सख्त प्रशासक भी हैं। जनहित के कार्यों में लापरवाही बरतने वालों को कतई नहीं बख्शने वाले हैं। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के तीखे तेवर देखकर नौकरशाहों के होश फाख्ता हैं।

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