Supreme Court PIL Warning : कैमरों के लिए पीआईएल नहीं, प्रचार हित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार
Supreme Court PIL Warning
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court PIL Warning) ने अदालतों को हर मुकदमे में एक साल के भीतर फैसला देने के निर्देश की मांग वाली जनहित याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिका को प्रचार हित याचिका (प्रचार हित याचिका) करार देते हुए सख्त टिप्पणी की और कहा कि अदालत के बाहर मौजूद कैमरों के लिए यहां याचिका दायर नहीं की जानी चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Suryakant), न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता कमलेश त्रिपाठी से सवाल किया कि सभी अदालतों को हर मामले में एक साल के भीतर फैसला देने का अनिवार्य निर्देश जनहित याचिका (जनहित याचिका) के माध्यम से कैसे दिया जा सकता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायिक व्यवस्था की अपनी सीमाएं और व्यावहारिक कठिनाइयां हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि उनकी याचिका देश में बदलाव लाने से जुड़ी है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी आकांक्षाओं के लिए औपचारिक याचिका उचित माध्यम नहीं है। यदि आप देश में बदलाव चाहते हैं, तो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court PIL) में याचिका दायर करना जरूरी नहीं है, बल्कि आप अपने सुझाव पत्र के माध्यम से भी रख सकते हैं।
सीजेआई ने कड़े शब्दों में कहा कि आप लोग सिर्फ बाहर खड़े कैमरामैन के सामने बोलने के लिए प्रचार हित याचिका (प्रचार हित याचिका) दाखिल न करें। अदालत किसी मंच की तरह इस्तेमाल करने की जगह नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यदि हर कोर्ट को एक साल में फैसला देना होगा, तो देश में कितनी अदालतें चाहिए होंगी।
पीठ ने यह भी कहा कि अदालतों में पहले से ही लाखों मामले लंबित हैं और हर मुकदमे के लिए समान समय-सीमा तय करना न्यायिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत में फैसला समयसीमा (अदालत में फैसला समयसीमा) को लेकर एकसमान निर्देश देना व्यवहारिक नहीं है।
अंत में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे इस विषय पर पत्र लिखकर अपनी बात रखें। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि जनहित याचिका (जनहित याचिका) का उद्देश्य वास्तविक जनसमस्याओं का समाधान होना चाहिए, न कि प्रचार या कैमरों के सामने बयानबाजी।
