Supreme Court Petition Withdrawn : बाबर के नाम पर मस्जिदों के नामकरण पर रोक की मांग सुप्रीम कोर्ट में नहीं टिक सकी, याचिका वापस

Supreme Court Petition Withdrawn

Supreme Court Petition Withdrawn

सुप्रीम कोर्ट में बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण और नामकरण पर रोक लगाने की मांग (Supreme Court petition withdrawn) करने वाली याचिका अंततः आगे नहीं बढ़ सकी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप करने को लेकर अनिच्छा जताई, जिसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने स्वयं ही याचिका वापस लेने का फैसला किया। अदालत ने इसे औपचारिक रूप से वापस लिए जाने के आधार पर निस्तारित कर दिया।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आया था। प्रारंभिक विचार के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि वह इस याचिका पर विचार करने के पक्ष में नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। अदालत ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा कि याचिका वापस लिए जाने के कारण इसे खारिज किया जाता है।

याचिका में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और संबंधित प्रशासनिक निकायों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी भी नई मस्जिद या धार्मिक ढांचे के निर्माण, स्थापना या नामकरण पर रोक लगाने के लिए आवश्यक (Supreme Court petition withdrawn) कदम उठाएं। साथ ही इस संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश या प्रशासनिक आदेश जारी करने की भी मांग की गई थी, ताकि भविष्य में इस तरह के नामकरण को रोका जा सके।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह तर्क रखा गया था कि देश में ऐतिहासिक रूप से आक्रमण से जुड़े व्यक्तियों के नाम पर धार्मिक संरचनाओं का निर्माण उचित नहीं है। इसी संदर्भ में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाए जाने की कथित घोषणा का भी उल्लेख किया गया और इस पर रोक लगाने की आवश्यकता जताई गई।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर किसी प्रकार का विस्तृत आदेश या टिप्पणी किए बिना याचिका को आगे सुनने से इनकार कर दिया। अदालत के इस रुख के बाद यह स्पष्ट हो गया कि फिलहाल इस मुद्दे पर न्यायिक स्तर पर कोई नया निर्देश जारी नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसला (Supreme Court petition withdrawn) सुनाया था। उस फैसले में विवादित स्थल पर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हुए केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए वैकल्पिक पांच एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। वर्तमान याचिका उस ऐतिहासिक फैसले से अलग एक नए मुद्दे से संबंधित थी, जिसे अदालत ने विचार योग्य नहीं माना।

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