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Supreme Court Hate Speech Order : अब चुप्पी नहीं, सख्ती..हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट ने जताया रूख सख्त…

अब नफरत फैलाने वाले शब्द कानूनी चुप्पी में नहीं डूबेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को साफ कहा है – नफरत के खिलाफ एक्शन तुरंत लो, वरना ये आग सबकुछ जला देगी।

Supreme Court Hate Speech Order : सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ती हेट स्पीच (नफरती भाषण) की घटनाओं पर सख्त नाराज़गी जताते हुए, केंद्र और राज्य सरकारों को दो टूक आदेश दिया है, अब सिर्फ शिकायत का इंतजार मत करो – पुलिस तुरंत खुद संज्ञान ले और FIR दर्ज करे।

कोर्ट(Supreme Court Hate Speech Order) ने स्पष्ट किया कि नफरत फैलाने वाली बातों को “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” की आड़ में छिपाना एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है, जिससे देश का धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना तार-तार हो रहा है।

https://navpradesh.com/pm-modi-monsoon-session-speech/

अब बिना शिकायत भी होगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court Hate Speech Order) ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे IPC की धाराएं 153A, 153B, 295A और 505 के तहत स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करें – भले ही कोई शिकायत दर्ज न हो।

कोर्ट ने चेतावनी दी-

यदि कोई भी अधिकारी कार्रवाई में देरी करता है या हिचकता है, तो उसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।

मीडिया को भी मिला कड़ा संदेश

सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court Hate Speech Order) ने खासकर टीवी चैनलों और उनके एंकरों को भी जिम्मेदार ठहराया।

एंकर बहस को कंट्रोल करें – नफरत को मंच नहीं, माइक बंद दें।

मीडिया से कहा गया कि वो टीआरपी के चक्कर में देश की एकता को न बेचें।

https://youtu.be/eCZRBt9XwlI

सरकार से भी जवाबदेही की मांग

कोर्ट ने केंद्र सरकार को हेट स्पीच रोकने के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित करने की सलाह दी।

अब इस मसले को तुच्छ या “राजनीतिक बहस” नहीं, राष्ट्रीय खतरे के रूप में देखा जाना चाहिए।

जनता के लिए क्या संदेश है?

सोशल मीडिया पर फैलती नफरत को रिपोर्ट करें

किसी समुदाय को निशाना बनाना अपराध है

अभिव्यक्ति की आजादी की सीमाएं तय हैं

धर्म, जाति, भाषा पर जहर उगलना आज़ादी नहीं, अपराध है

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