Sukma Naxal Surrender : सुकमा में माओवादियों का टूटता नेटवर्क, इनामी समेत 29 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

Sukma Naxal Surrender

Sukma Naxal Surrender

सीजी भास्कर, 14 जनवरी। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही रणनीति अब निर्णायक मोड़ (Sukma Naxal Surrender) पर पहुंचती नजर आ रही है। सुकमा जिले में बुधवार को माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा, जब 29 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वालों में एक ऐसा माओवादी भी शामिल है, जिस पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह सामूहिक आत्मसमर्पण न केवल संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अब नक्सली प्रभाव वाले इलाकों में हालात तेजी से बदल रहे हैं।

कई गंभीर घटनाओं में रही थी भूमिका

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी सुकमा के गोगुंडा क्षेत्र के अंतर्गत केरलापाल एरिया कमेटी से जुड़े हुए थे। इनमें से कई नक्सली जिले में हुई बड़ी हिंसक वारदातों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। सरेंडर करने वालों में गोगुंडा पंचायत क्षेत्र में सक्रिय संगठन से जुड़े पोड़ियाम बुधरा भी शामिल हैं, जिनके सिर पर लंबे समय से इनाम घोषित था।

सुरक्षा शिविर बना निर्णायक फैक्टर

अधिकारियों का कहना है कि गोगुंडा इलाके में सुरक्षा शिविर की स्थापना ने हालात को पूरी तरह (Sukma Naxal Surrender) बदल दिया। लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों, क्षेत्र में बढ़ी सुरक्षा मौजूदगी और दबाव के चलते माओवादी संगठन की गतिविधियां सीमित होती चली गईं। इसका असर यह हुआ कि कैडरों का संगठन से भरोसा उठने लगा और उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया।

गौरतलब है कि दुर्गम जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह इलाका लंबे समय तक माओवादियों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन सुरक्षा शिविर बनने के बाद संगठन की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गई।

नक्सल प्रभाव से मुक्त होने की ओर केरलापाल क्षेत्र

29 माओवादियों के एक साथ सरेंडर करने के बाद केरलापाल एरिया कमेटी अब नक्सली प्रभाव से लगभग मुक्त होने के अंतिम चरण में पहुंच गई है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में यहां और भी माओवादी आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

पुनर्वास नीति ने बदला नजरिया

छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति भी सरेंडर की इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रही है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के साथ-साथ पुनर्वास (Sukma Naxal Surrender) से जुड़ी अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी, ताकि वे मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन शुरू कर सकें।

सरेंडर की रफ्तार बनी हुई है तेज

हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिला है। कुछ दिन पहले दंतेवाड़ा जिले में 63 माओवादियों ने सरेंडर किया था। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में राज्य में 1500 से अधिक नक्सलियों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण का रास्ता चुना।