Somanna Maoist Surrender : डेडलाइन से पहले बड़ा सरेंडर! माओवादी नेटवर्क को झटका, स्टेट कमेटी सदस्य सोमन्ना ने डाले हथियार

नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता (Somanna Maoist Surrender) हाथ लगी है। चेल्लुरु नारायण राव उर्फ सोमन्ना ने डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले आत्मसमर्पण कर दिया है, जिससे माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका माना जा रहा है।
विजयवाड़ा में किया सरेंडर (Somanna Maoist Surrender)
सूत्रों के मुताबिक, सोमन्ना ने विजयवाड़ा में सुरक्षा एजेंसियों के सामने आत्मसमर्पण किया। वह माओवादी संगठन में स्टेट कमेटी सदस्य के साथ-साथ आंध्र-ओडिशा बॉर्डर (AOB) क्षेत्र में सक्रिय एक बड़ा चेहरा था।
संगठन में थी अहम भूमिका
सोमन्ना न सिर्फ AOB स्टेट कमेटी का प्रमुख सदस्य था, बल्कि केंद्रीय क्षेत्रीय समिति (CRC) की तीसरी कंपनी का कमांडर भी रह चुका है। बताया जाता है कि शीर्ष माओवादी नेताओं गजरला रवि और अरुणा की मौत के बाद इस क्षेत्र की कमान उसी के पास थी।
डेडलाइन से पहले बड़ी सफलता
केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य (Somanna Maoist Surrender) तय किया है। ऐसे में इस समयसीमा से ठीक पहले सोमन्ना जैसे वरिष्ठ माओवादी नेता का सरेंडर सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
कमजोर पड़ रहा माओवादी नेटवर्क
लगातार चल रहे ऑपरेशन और सख्त रणनीति के चलते माओवादी संगठन का नेटवर्क कमजोर होता नजर आ रहा है। शीर्ष स्तर के नेताओं के सरेंडर और एनकाउंटर से संगठन की पकड़ ढीली पड़ रही है।
अभियान को मिलेगी और मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आत्मसमर्पण से सुरक्षा बलों को नक्सल नेटवर्क की अंदरूनी जानकारी (Somanna Maoist Surrender) भी मिलती है, जिससे आगे के ऑपरेशन और प्रभावी बनते हैं।



