संपादकीय

संपादकीय: बदजुबानी से बाज आएं बड़े नेता

Editorial: जब भी कोई चुनाव होता है बयानवीार नेताओं की बद्जुबानी बढ़ जाती है। छोटे नेता यदि एक दूसरे पर आरोप लगाते समय मर्यादा की सीमा रेखा लांघे तो भी बात समझ में आती है तो यदि बड़े नेता बदजुबानी पर उतर आये तो चुनावी माहौल खराब होने लगता है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्रकार वार्ता के दौरान ही आतंकवादी बोल दिया। इससे वहां उपस्थित पत्रकार ही हथप्रभ रह गये।

जब किसी पत्रकार ने उन्हें इसके लिए टोका तो मल्ल्किार्जुन खडग़े ने सफाई दी कि उन्होंने प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा है उनके कहने का आशय दूसरा था। जबकि मीडिया के सामने यह बयान रिकॉर्ड हुआ है। मल्लिकार्जुन खडग़े जैसे वरिष्ठ नेता को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस में जितनी भी नाराजगी हो लेकिन उसे व्यक्त करते समय उन्हें प्रधानमंत्री पद की गरिमा का तो ध्यान रखना चाहिए।

एक राष्ट्रीय पार्टी का अध्यक्ष इस तरह का बयान देगा तो वह अपने अधिनस्थ नेताओं की बद्जुबानी पर भला किस मुंह से रोक लगा पाएगा। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से विवादास्पद बयानबाजी करने की होड़ इसीलिए लगी हुई है क्योंकि इन पार्टियों के बड़े नेता ही मर्यादा की सीमा लांघते हैं। बोल वचन करने वाले ऐसे नेता खुद अपनी पार्टी को नुकसान पहुंचाते हैं।

पूर्व में इसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं जब नेताओं के बद्जुबानी के कारण ही राजनीतिक पार्टियों को अपनी जीती हुई बाजी हारनी पड़ी थी। इसके बावजूद ये बड़बोले नेता कोई सबक सीखने को तैयार नहीं है। बेहतर होगा कि बड़े नेता संयम बरतें और अपनी पार्टी के अन्य नेताओं के सामने आदर्श पेश करें।

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