Sand Mining : नदी में मशीनों की गूंज से बढ़ी हलचल, आखिर किसकी अनुमति से हो रहा रेत का बड़ा खेल

रिपोर्टर : साहिल राज लहरे

बम्हनीडीह क्षेत्र के ग्राम पंचायत गतवा में इन दिनों हसदेव नदी को लेकर ग्रामीणों के बीच लगातार चर्चा (Sand Mining ) बनी हुई है। गांव के लोगों का आरोप है कि नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकासी का काम चल रहा है, लेकिन इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर बहुत कम लोगों को है। कई ग्रामीण यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर रेत घाट की प्रक्रिया कब पूरी हुई और किस आधार पर ठेकेदार को काम की अनुमति मिली।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी किनारे दिन रात भारी मशीनें और वाहन नजर आ रहे हैं। इससे इलाके में हलचल बढ़ गई है और लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। गांव में यह मुद्दा अब चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।

सरपंच ने जताई अनभिज्ञता : Sand Mining

ग्राम पंचायत के सरपंच ने बताया कि उन्हें रेत घाट के संचालन या ठेकेदार को अनुमति दिए जाने की जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि पहले गांव के लोगों की जरूरत को देखते हुए सीमित मात्रा में रेत निकालने की सहमति दी गई थी, लेकिन किसी निजी ठेकेदार को व्यावसायिक खनन के लिए अनुमति नहीं दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकासी की जा रही है और इसे दूसरे स्थानों पर भंडारित भी किया जा रहा है।

भारी मशीनों से निकाली जा रही रेत

स्थानीय लोगों के मुताबिक हसदेव नदी में कई भारी मशीनों और लोडर वाहनों की मदद से रेत निकाली जा रही है। आरोप है कि नदी से निकाली गई रेत को सिलादेही पुल के पास बड़ी मात्रा में जमा किया जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि बारिश के मौसम में रेत की मांग बढ़ने पर इसे अधिक कीमत पर बेचने की तैयारी की जा रही है।

नियमों के उल्लंघन का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नदी में मशीनों का उपयोग कर रेत खनन किया जा रहा है, जबकि ऐसे कार्यों को लेकर सख्त नियम निर्धारित हैं। उनका कहना है कि मशीनों के उपयोग से नदी के भीतर बड़े गड्ढे बन रहे हैं, जो भविष्य में दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। लोगों का यह भी कहना है कि लगातार हो रहे खनन से नदी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है।

कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए (Sand Mining) हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है, जिससे अवैध खनन करने वालों के हौसले बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि रेत निकासी के लिए किन शर्तों पर अनुमति दी गई और क्या सभी नियमों का पालन किया जा रहा है।

विभागीय पक्ष का इंतजार

मामले को लेकर खनिज विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी। अब लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। ग्रामीण चाहते हैं कि नदी और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएं।

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