Sabarimala case : जस्टिस नागरत्ना बोलीं- कोई महिला 3 दिन अछूत और चौथे दिन पवित्र कैसे हो सकती है?

सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर और महिलाओं के हक को लेकर एक बहुत बड़ी बहस (Sabarimala case) चल रही है। 9 जजों की बेंच इस मामले को देख रही है और इसी दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने एक ऐसी बात कह दी जो सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा का विषय बन गई है।
उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि क्या किसी महिला को उसके मासिक धर्म की वजह से महीने के तीन दिन अछूत माना जा सकता है? उन्होंने कहा कि यह समझना उनके लिए भी मुश्किल है कि कैसे कोई महिला तीन दिन के लिए अपवित्र हो जाती है और चौथे दिन अचानक वह ठीक मान ली जाती है।
अदालत में क्यों छिड़ी यह बहस (Sabarimala case)
दरअसल, मामला सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर रोक (Sabarimala case) से जुड़ा है। कोर्ट में इस बात पर चर्चा हो रही थी कि क्या यह रोक संविधान के आर्टिकल 17 के तहत आती है, जो छुआछूत को खत्म करने की बात करता है। केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर ऐतराज जताया।
उन्होंने कहा कि 2018 के फैसले में इसे ‘अस्पृश्यता’ या छुआछूत का नाम देना सही नहीं था। उनका कहना है कि भारत को पितृसत्तात्मक देश कहना गलत है और सबरीमाला का मामला केवल एक खास उम्र की महिलाओं और वहां की परंपरा से जुड़ा है, न कि किसी तरह के भेदभाव से।
सॉलिसिटर जनरल की अपनी दलील (Sabarimala case)
तुषार मेहता ने कोर्ट के सामने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि भगवान अय्यप्पा के बाकी सभी मंदिर महिलाओं के लिए खुले हैं, सिर्फ इसी एक मंदिर में यह खास नियम है। उन्होंने साफ किया कि यह मामला मासिक धर्म से ज्यादा एक खास आयु वर्ग के लिए तय की गई परंपरा का है।
हालांकि, जस्टिस नागरत्ना उनकी बातों से पूरी तरह सहमत नहीं दिखीं। उन्होंने एक महिला के तौर पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इस तरह की पाबंदी को ‘छुआछूत’ के नजरिए से देखा जाना चाहिए या नहीं, इसी पर सबसे बड़ी बहस है।
2018 से अब तक क्या हुआ
यह सारा विवाद सितंबर 2018 के उस फैसले के बाद से बढ़ा है, जिसमें 5 जजों ने बहुमत से कहा था कि महिलाओं को मंदिर जाने से रोकना (Sabarimala case) गलत है। इसके बाद मामला फिर से रिव्यू में गया और अब 9 जजों की बड़ी बेंच इस पर गहराई से सुनवाई कर रही है।
कोर्ट यह तय करने की कोशिश कर रहा है कि धर्म की आजादी और बराबरी का अधिकार, इन दोनों में से किसे ऊपर रखा जाए। फिलहाल सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस पर कई और बड़े बयान देखने को मिल सकते हैं।



