छत्तीसगढ़

Rural Engineering Service suspension : पंचायत विभाग में रिश्वतखोरी पर सख्त कार्रवाई, दो अधिकारी निलंबित

छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सूरजपुर और सुकमा जिले के ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के दो अधिकारियों को निलंबित (Rural Engineering Service suspension) कर दिया है। यह कार्रवाई विभाग में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में की गई है। राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि विभाग में किसी भी स्तर पर अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस अपनाया जाएगा।

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सूरजपुर जिले के प्रेमनगर उप संभाग के सहायक अभियंता ऋषिकांत तिवारी और सुकमा जिले के छिंदगढ़ जनपद के उप अभियंता प्रदीप कुमार बघेल को हाल ही में रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार होने के बाद दोनों अधिकारियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। इसके तुरंत बाद शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम के तहत दोनों अधिकारियों को निलंबित करने का निर्णय लिया।

रिश्वतखोरी पर जीरो टॉलरेंस का संदेश

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के प्रति पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग में किसी भी प्रकार की अनियमितता, रिश्वतखोरी या पद के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि जनहित की योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मंत्री विजय शर्मा ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी लगातार निगरानी में रहेंगे। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के सभी प्रोजेक्ट, जैसे सड़क निर्माण, पुल एवं जल संरचनाओं के निर्माण में भ्रष्टाचार के किसी भी प्रयास को तुरंत निपटाया जाएगा।

स्थानीय विकास और सरकारी योजनाओं की सुरक्षा

सरकार का मानना है कि ग्राम स्तर पर भ्रष्टाचार रोकना आवश्यक है ताकि ग्रामीण जनता को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में कई डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू की हैं, जिससे प्रोजेक्ट के हर स्टेप का रिकॉर्ड उपलब्ध हो और किसी भी अधिकारी के अनियमित व्यवहार की पहचान की जा सके।

विशेष रूप से ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधिकारी स्थानीय सड़क, पुल और जल संरचनाओं के निर्माण कार्यों में सीधे शामिल होते हैं। इस कारण, भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी से परियोजनाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और ग्रामीणों का हित नुकसान में जा सकता है। ऐसे में शासन ने दो अधिकारियों के निलंबन के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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भविष्य की कार्रवाई और प्रशासनिक कदम

निलंबित अधिकारियों के स्थान पर विभाग ने तात्कालिक रूप से नई तैनाती करने और कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग जारी रखने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के सभी कार्यालयों में नियमित ऑडिट और निरीक्षण बढ़ाए जा रहे हैं। अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है कि वे पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपने कार्यों का पालन करें।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का यह कदम अन्य अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी है कि कोई भी अनियमितता या भ्रष्टाचार का प्रयास नहीं करेगा। विभाग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी भ्रष्टाचार के मामलों में तत्काल जांच और निलंबन की कार्रवाई होगी।

इस कार्रवाई के माध्यम से राज्य सरकार ने यह संदेश दिया है कि [ग्रामीण यांत्रिकी सेवा] में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है और सभी अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे जनहित के कार्यों में पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करें।

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