RTE Admission Chhattisgarh : अब गरीब बच्चों के लिए प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई आसान, डिजिटल सिस्टम से बदल रही तस्वीर

छत्तीसगढ़ में इन दिनों RTE Admission Chhattisgarh को लेकर काफी सकारात्मक माहौल बनता दिख रहा है। जिन परिवारों के लिए प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाना कभी सपना जैसा लगता था, अब वही सपना धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहा है। गांव और शहर दोनों जगहों पर अभिभावकों में इस नई व्यवस्था को लेकर उत्सुकता साफ नजर आ रही है।

ग्राउंड पर बात करें तो कई माता-पिता कह रहे हैं कि अब पहले जैसा दौड़भाग और सिफारिश का दबाव कम हो गया है। ऑनलाइन प्रक्रिया आने से भरोसा भी बढ़ा है और लोगों को लग रहा है कि उनके बच्चों को सही मौका मिल सकता है। खासकर गरीब परिवारों में इसको लेकर राहत जैसा माहौल है।

डिजिटल सिस्टम से RTE admission 2026 हुआ आसान

राज्य सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून को प्रदेश में बेहतर तरीके से लागू करने और गरीब बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया शुरू की है। इस नई व्यवस्था के तहत अब प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के जरिए एडमिशन लेना पहले से काफी आसान हो गया है। पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन और साफ तरीके से की जा रही है।

हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना उसका अधिकार है और यह संविधान में भी दिया गया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाना पहले मुश्किल होता था, लेकिन RTE कानून ने इसे काफी हद तक आसान बना दिया है। अब इस व्यवस्था को और मजबूत करते हुए इसे डिजिटल रूप में लागू किया गया है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया और सरल हो गई है।

Private School Admission में बदलाव

छत्तीसगढ़ सरकार ने आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाकर एक नई पहल की है। अब निजी स्कूलों में एडमिशन ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जा रहा है। इसका फायदा यह हो रहा है कि बड़ी संख्या में बच्चों को बिना भेदभाव के निजी स्कूलों में प्रवेश मिल पा रहा है।

डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से शिक्षा के अधिकार को अंतिम स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इससे भ्रष्टाचार पर भी लगाम लग रही है और पात्र बच्चों को बराबरी का मौका मिल रहा है।

Education Scheme में पारदर्शिता

पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया के जरिए RTE को लागू करना अब शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश अब पहले से ज्यादा सरल और निष्पक्ष तरीके से हो रहा है। आवेदन से लेकर स्कूल चयन तक हर स्टेप ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे स्कूल प्रबंधन की सीधी दखल लगभग खत्म हो गई है।

आवेदन का सत्यापन भी सिस्टम के जरिए अपने आप हो जाता है और चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया जाता है। अभिभावकों को एसएमएस के जरिए जानकारी मिलती रहती है जिससे उन्हें हर अपडेट मिलता है। मोबाइल से ही आवेदन करने की सुविधा भी दी गई है, जिससे घर बैठे पूरी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

लाखों बच्चों को मिल रहा फायदा

राज्य सरकार की इस योजना से करीब 3 लाख 63 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए शुल्क प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इस योजना का फायदा मिल सके।

पूरी एडमिशन प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित हो रही है जिसमें आवेदन, दस्तावेज सत्यापन और चयन सभी चरण तकनीक आधारित हैं। अभिभावक खुद या चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के समय ही आसपास के 1.5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्कूलों और उपलब्ध सीटों की जानकारी भी दिखाई जाती है जिससे सही चयन करना आसान हो जाता है।

RTE में ऐसे मिलता है प्रवेश

सरकार के निर्देश के अनुसार साढ़े पांच से साढ़े छह साल तक के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश दिया जाता है। अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग और अन्य कमजोर वर्ग के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है। जहां सीटें खाली रह जाती हैं वहां जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी भी कराई जाती है जिसकी जानकारी पोर्टल पर दी जाती है।

यह पहल न सिर्फ हजारों बच्चों के सपनों को पूरा कर रही है बल्कि राज्य में एक पारदर्शी और जिम्मेदार शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत कर रही है। आने वाले समय में इसका असर और ज्यादा देखने को मिल सकता है।

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