Consumer Court : बैंक की मनमानी पर लगा ब्रेक, उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक को दिलाई राहत

बलौदाबाजार जिले में एक बैंक ग्राहक को लंबे समय से चल रहे विवाद में बड़ी राहत मिली है। खाते से राशि कटौती और वित्तीय रिकॉर्ड प्रभावित होने की शिकायत को लेकर उपभोक्ता द्वारा की गई कानूनी लड़ाई आखिरकार उसके पक्ष में गई। आयोग के फैसले के बाद बैंकिंग सेवाओं में पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है।

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी लोगों की रुचि बनी रही, क्योंकि इसमें बैंक खाते से राशि कटौती और सिबिल स्कोर प्रभावित होने जैसे गंभीर मुद्दे जुड़े थे। आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

ग्राहक की शिकायत पर आयोग का फैसला : Consumer Court

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बलौदाबाजार ने एक मामले की सुनवाई करते हुए बैंक को सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग ने बैंक को ग्राहक के खाते से काटी गई शेष राशि वापस करने और अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

क्या था पूरा मामला

भाटापारा निवासी बृजमोहन आनंद ने ओवर ड्राफ्ट खाते के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि नवीनीकरण करने के बजाय बैंक ने खाता लॉक कर दिया और खाते से विभिन्न मदों में राशि की कटौती कर ली। बाद में शिकायत करने पर कुछ राशि लौटाई गई, लेकिन पूरी रकम वापस नहीं की गई।

सिबिल स्कोर प्रभावित होने का आरोप

परिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि बैंक की कार्रवाई के कारण उनका सिबिल स्कोर प्रभावित (Consumer Court) हुआ, जिससे उन्हें आर्थिक और व्यक्तिगत परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।

दस्तावेजों के आधार पर हुई सुनवाई

आयोग ने प्रस्तुत दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण किया। सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि ग्राहक द्वारा कई बार निवेदन किए जाने के बावजूद शेष राशि वापस नहीं की गई। आयोग ने यह भी माना कि शिकायत के तथ्यों का प्रभावी खंडन नहीं किया गया।

बैंक को लौटानी होगी राशि

आयोग ने आदेश दिया है कि ग्राहक को शेष 87 हजार 536 रुपये निर्धारित ब्याज सहित वापस किए जाएं। इसके साथ ही मानसिक और शारीरिक क्षति के लिए 15 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 7 हजार रुपये देने का निर्देश भी दिया गया है।

45 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान

आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि निर्धारित राशि और मुआवजा आदेश की तिथि से 45 दिनों के भीतर ग्राहक को प्रदान किया (Consumer Court) जाए। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Exit mobile version