Road Safety : सड़क दुर्घटनाओं पर सख्ती, समन्वय और निगरानी से ही आएगी कमी : मुख्य सचिव
Road Safety
राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित (Road Safety) व सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ जिम्मेदारी निभानी होगी। यह बात मुख्य सचिव विकासशील ने राज्य सड़क सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क दुर्घटनाएं किसी एक विभाग की समस्या नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी हैं और इनके प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ ज़मीनी क्रियान्वयन जरूरी है।
मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही 108 एम्बुलेंस सेवा समय पर घटनास्थल तक पहुँचे और इसकी सतत मॉनिटरिंग वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने दुर्घटना में घायलों के बेहतर उपचार के लिए ट्रॉमा सेंटरों को और अधिक सुदृढ़ करने, आवश्यक दवाइयों, जांच सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही युवाओं की सहभागिता से Road Safety Awareness (Road Safety) को जन आंदोलन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।
बैठक में सभी जिलों के कलेक्टरों को District Road Safety Committee की नियमित बैठकें आयोजित करने, सड़क दुर्घटनाओं की निरंतर समीक्षा करने और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। सचिव परिवहन एस. प्रकाश ने विभागीय गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की, जबकि अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि चिन्हांकित 152 Black Spots (Black Spots) में से 102 स्थानों पर सुधार कार्य पूर्ण कर लिया गया है और शेष 50 पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
यातायात नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध पुलिस विभाग द्वारा 8 लाख 15 हजार 954 मामलों में कार्रवाई कर 33 करोड़ 22 लाख 39 हजार 300 रुपये की राशि वसूल की गई, वहीं परिवहन विभाग द्वारा 38.52 करोड़ रुपये का शमन शुल्क वसूला गया। वर्ष 2025 में प्रदेशभर में 150 जिला सड़क सुरक्षा समिति बैठकों का आयोजन किया गया।
सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के त्वरित उपचार हेतु 8 जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन सुविधा, सभी जिला अस्पतालों में 24×7 एक्स-रे, लैब जांच, इमरजेंसी दवाइयों और इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और पैरामेडिकल कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। शाला सुरक्षा कार्यक्रमों के अंतर्गत लगभग 4 लाख 47 हजार प्रशिक्षण सत्रों और 7 लाख 19 हजार यूट्यूब व्यू के माध्यम से शिक्षक व विद्यार्थी लाभान्वित हुए।
यातायात जागरूकता के 15 हजार से अधिक कार्यक्रम शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित किए गए। प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में 3 लाख 72 हजार से अधिक एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गईं और 1 लाख से अधिक अतिरिक्त लाइटों को स्वीकृति दी गई। इसके अलावा 5,388 अधिकारियों-कर्मचारियों को सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
मुख्य सचिव ने Hit and Run Cases (Hit and Run) में पीड़ितों को शीघ्र राहत दिलाने के लिए जिला दावा निपटान समितियों को समय-सीमा में प्रकरण निपटाने और बीमा कंपनियों से समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए। बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और शराब सेवन कर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। विशेष रूप से रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सरगुजा और बस्तर जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों की गहन समीक्षा कर प्रभावी कार्ययोजना बनाने को कहा गया।
स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि कक्षा पहली से दसवीं तक के पाठ्यक्रमों में सड़क सुरक्षा विषयक पाठों का परिमार्जन पूरा कर लिया गया है, जिसे आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल में Road Safety Club (Road Safety Club) गठित कर नियमित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की संख्या अधिक है, जिनमें सबसे ज्यादा मौतें दोपहिया वाहन चालकों की बिना हेलमेट वाहन चलाने के कारण हो रही हैं। इस पर सख्ती और जनजागरूकता दोनों बढ़ाने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने एनएचएआई और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सड़क डिजाइन सुधार, ब्लैक स्पॉट सुधार और समयबद्ध कार्य निष्पादन के लिए तत्परता से काम करने के निर्देश दिए।
बैठक मंत्रालय में वर्चुअल माध्यम से आयोजित हुई, जिसमें नगरीय प्रशासन, लोक निर्माण, गृह, परिवहन, स्वास्थ्य, पुलिस, एनएचएआई सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, संभाग आयुक्त, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे।
