Cyber Fraud Case : साइबर धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, चार्टर्ड अकाउंटेंट को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

640 करोड़ रुपये के बड़े साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को अग्रिम जमानत देने से इनकार (Cyber Fraud Case) कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस आगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी भास्कर यादव को राहत देने से मना कर दिया। इसके साथ ही हाई कोर्ट द्वारा दिए गए उस निर्देश को भी कायम रखा गया, जिसमें यादव को 10 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने को कहा गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 फरवरी 2026 को भास्कर यादव और अशोक कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने अपने 22 पृष्ठों के विस्तृत आदेश (Cyber Fraud Case) में कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग एक जटिल और संगठित अपराध है, जिसकी जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आरोपियों से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक है। कोर्ट ने माना कि आरोपी एक कुशल पेशेवर होने के बावजूद कथित तौर पर अपराध की रकम को छिपाने और उसे कई स्तरों पर व्यवस्थित करने में शामिल रहा है, जिसे उजागर करने के लिए कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी है।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया था कि आरोपियों के खिलाफ जांच अधिकारियों पर हमले करने, साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों को दबाने के लिए स्थानीय पुलिस को रिश्वत देने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को नष्ट करने के आरोप भी सामने (Cyber Fraud Case) आए हैं। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखने के बाद अब आरोपी के पास आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। यह मामला देश में बढ़ते साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एजेंसियों की सख्त कार्रवाई का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।



