छत्तीसगढ़

RERA Rules India : रेरा के आदेश सिर्फ फाइलों में? सुपर बिल्ट-अप पर रोक के बावजूद प्रदेश में जारी रजिस्ट्रियां

रियल एस्टेट सेक्टर में कार्पेट एरिया बनाम सुपर बिल्ट-अप एरिया का विवाद एक बार फिर सुर्खियों (RERA rules India) में है। सवाल यह है कि जब रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने साफ निर्देश दे दिए हैं कि फ्लैट की बिक्री और रजिस्ट्री केवल कार्पेट एरिया के आधार पर होगी, तो फिर जमीनी स्तर पर सुपर बिल्ट-अप एरिया के हिसाब से रजिस्ट्रियां कैसे हो रही हैं?

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रेरा अधिनियम 2016 की धारा 2(के) में सुपर बिल्ट-अप एरिया का कोई उल्लेख नहीं है। कानून की मंशा स्पष्ट है कि उपभोक्ता को वही क्षेत्र बेचा जाए, जिसका वह वास्तव में उपयोग करता है। इसके बावजूद प्रदेश के कई प्रोजेक्ट्स में बिल्डर अब भी सुपर बिल्ट-अप के आधार पर कीमत तय कर रहे हैं और रजिस्ट्रार कार्यालयों में उसी आधार पर दस्तावेज पंजीकृत हो रहे हैं।

RERA Rules India
RERA Rules India

रेरा के आदेश क्या कहते हैं?

रेरा ने इस मुद्दे पर 11 अक्टूबर 2024 और 30 अप्रैल 2025 को स्पष्ट आदेश (RERA rules India) जारी किए।
30 अप्रैल 2025 के आदेश में कहा गया कि:

रेरा अधिनियम में सुपर बिल्ट-अप एरिया का कोई प्रावधान नहीं है

फ्लैट की रजिस्ट्री और एग्रीमेंट केवल कार्पेट एरिया के आधार पर होंगे

विज्ञापन, ब्रोशर और प्रचार सामग्री में सिर्फ कार्पेट एरिया दर्शाया जाए

हालांकि, आदेश में यह भी जोड़ा गया कि प्रमोटर बालकनी, सीढ़ी, कॉरिडोर या ओपन एरिया का अलग से उल्लेख कर सकते हैं। जानकारों का कहना है कि इसी बिंदु की आड़ में बिल्डर अप्रत्यक्ष रूप से सुपर बिल्ट-अप की अवधारणा को जिंदा रखे हुए हैं।

जमीनी हकीकत: निगरानी न के बराबर

रेरा के स्पष्ट आदेशों के बावजूद:

रजिस्ट्रार कार्यालयों से यह जानकारी नहीं ली गई कि रजिस्ट्रियां किस आधार पर हो रही हैं

न तो व्यापक जांच हुई और न ही किसी बड़े दंडात्मक कदम की खबर सामने आई

उपभोक्ताओं को अब भी भ्रमित करने वाले ब्रोशर और विज्ञापन जारी हैं

कार्पेट एरिया और सुपर बिल्ट-अप में फर्क क्या है?

कार्पेट एरिया वह वास्तविक उपयोगी क्षेत्र होता है, जिसमें कमरे, रसोई और बाथरूम शामिल होते हैं।
वहीं सुपर बिल्ट-अप एरिया में सीढ़ियां, लिफ्ट, कॉरिडोर और अन्य साझा हिस्से जोड़ दिए (RERA rules India) जाते हैं। कई मामलों में यह अतिरिक्त क्षेत्र 30 से 40 प्रतिशत तक हो जाता है, जिससे खरीदार को कम उपयोगी जगह के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बहुमंजिला इमारतों में सीढ़ी और लिफ्ट जरूरी जरूर हैं, लेकिन उनका अलग से मूल्य जोड़ना उपभोक्ता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है। प्रचार सामग्री में बड़े अक्षरों में सुपर बिल्ट-अप एरिया दिखाया जाता है, जबकि कार्पेट एरिया अपेक्षाकृत कम होता है यहीं से भ्रम की शुरुआत होती है।

https://youtu.be/dme-xq8a6hQ

उपभोक्ताओं के अधिकार क्या कहते हैं कानून?

रेरा कानून के अनुसार:

एग्रीमेंट और रजिस्ट्री दस्तावेज में कार्पेट एरिया का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य है

यदि सुपर बिल्ट-अप के आधार पर रजिस्ट्री की जाती है, तो यह कानून का उल्लंघन है

ऐसे मामलों में उपभोक्ता राज्य रेरा में शिकायत दर्ज करा सकता है

बड़ा सवाल अब भी कायम

रेरा के आदेश जारी होने के बावजूद यदि सख्त निगरानी और कार्रवाई नहीं होती, तो ये आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे। उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि जब तक रजिस्ट्रार कार्यालयों और प्रमोटरों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आम खरीदार सुपर बिल्ट-अप के जाल में फंसता रहेगा।

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