बस्तर में इस महीने होने वाली बड़ी बैठक को लेकर प्रशासनिक और सुरक्षा हलकों में हलचल तेज हो गई है। जगदलपुर में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर लगातार तैयारियां चल रही हैं और स्थानीय स्तर पर भी इसकी चर्चा जोरों पर है। लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों की वजह से सुर्खियों में रहे इलाके में अब विकास और सुरक्षा को लेकर नए संकेत मिलने लगे हैं। लोगों के बीच यह सवाल भी बना हुआ है कि आखिर इस बार बस्तर को लेकर क्या बड़ा फैसला होने वाला है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क दिखाई दे रही हैं। बताया जा रहा है कि इस बैठक में केवल सुरक्षा हालात की समीक्षा नहीं होगी, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए नई रणनीति भी तय की जा सकती है। बस्तर में चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी को लेकर भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर खास महत्व माना जा रहा है।
चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की होगी मौजूदगी : Red Corridor
19 मई को जगदलपुर में आयोजित होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नक्सलवाद उन्मूलन और विकास योजनाओं को लेकर बड़ा मंथन होने की संभावना जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस दौरान बस्तर 2.0 की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसे केवल सुरक्षा बैठक नहीं बल्कि नक्सलवाद मुक्त भारत के अगले चरण की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
सुरक्षा और विकास दोनों पर रहेगा फोकस
केंद्र सरकार अब बस्तर को रेड कॉरिडोर की पहचान से बाहर निकालकर विकास के बड़े क्षेत्र के रूप में स्थापित करना चाहती है। इसी वजह से बैठक में सुरक्षा के साथ साथ सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल नेटवर्क, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी विस्तार से चर्चा होगी।
पिछले कुछ वर्षों से केंद्र सरकार सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम (Red Corridor) कर रही है। अब उसी मॉडल को अंतिम चरण में पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
सीमावर्ती जिलों पर खास नजर
बैठक में राज्यों के बीच बेहतर सुरक्षा समन्वय को लेकर भी चर्चा होगी। सीमावर्ती जिलों में संयुक्त अभियान, खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
ड्रोन निगरानी, रियल टाइम सूचना साझेदारी और सड़क नेटवर्क विस्तार जैसे मुद्दों को भी बैठक का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इन क्षेत्रों में लगातार नई रणनीति पर काम कर रही हैं।
कई अहम मुद्दों पर होगा मंथन
बैठक में वर्ष 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा आदिवासी इलाकों में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और मोबाइल कनेक्टिविटी की स्थिति की समीक्षा भी की जाएगी। सुरक्षा कैंपों के विस्तार, आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय व्यवस्था तैयार करने पर भी चर्चा होने की संभावना है।
बस्तर मॉडल पर पूरे देश की नजर
बस्तर में होने वाली यह बैठक आने वाले समय में देश की आंतरिक सुरक्षा नीति के लिए अहम मानी (Red Corridor) जा रही है। यदि सुरक्षा और विकास की संयुक्त रणनीति सफल होती है तो इसे दूसरे संवेदनशील इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे इलाके में इस स्तर की बैठक एक बड़ा राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश भी मानी जा रही है। सरकार यह दिखाना चाहती है कि जिन इलाकों में कभी हिंसा और असुरक्षा का माहौल था, वहां अब विकास और नई योजनाओं की तस्वीर तैयार की जा रही है।
