High Court Order : कर्मचारियों के वेतन मामले में अदालत सख्त, विश्वविद्यालय को तय समय में आदेश पालन की हिदायत

बिलासपुर में विश्वविद्यालय कर्मचारियों के वेतन और नियमितीकरण को लेकर चल रहे मामले ने एक बार फिर जोर पकड़ (High Court Order) लिया है। लंबे समय से अपने अधिकारों की मांग कर रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के बीच अदालत के ताजा आदेश के बाद नई उम्मीद दिखाई दी। सोमवार को न्यायालय के फैसले की चर्चा विश्वविद्यालय परिसर से लेकर कर्मचारी संगठनों तक होती रही।

कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से आदेश मिलने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं। वहीं अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। मामले को लेकर कर्मचारी पक्ष और प्रबंधन के बीच बहस भी तेज हो गई है।

अदालत ने 15 दिन का समय दिया : High Court Order

बिलासपुर हाई कोर्ट ने गुरुघासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों को नियमित पद के अनुसार वेतन भुगतान किया जाए। अदालत ने इसके लिए 15 दिनों की समय सीमा तय की है।

कर्मचारियों ने दायर की अवमानना याचिका

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि अदालत और उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसी को लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई थी।

पुराने आदेश का नहीं हुआ पालन

कर्मचारी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2023 में पारित आदेश में कर्मचारियों को नियमित (High Court Order) मानते हुए सभी लाभ देने की बात कही गई थी। साथ ही नियमितीकरण को वर्ष 2008 से प्रभावी मानने का निर्देश भी दिया गया था। इसके बावजूद अब तक पूरी प्रक्रिया लागू नहीं हुई।

उच्चतम न्यायालय से भी नहीं मिली राहत

विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। बाद में पुनर्विचार याचिका भी लगाई गई लेकिन दोनों ही याचिकाएं खारिज हो गईं। इसके बाद भी आदेश का पालन नहीं होने की बात अदालत में रखी गई।

विश्वविद्यालय ने दस्तावेजों का दिया तर्क

विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जा चुका है लेकिन कुछ जरूरी दस्तावेजों के सत्यापन में देरी हो रही है। प्रशासन ने अदालत को बताया कि दस्तावेज नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।

कर्मचारियों ने दावे को बताया गलत

कर्मचारी पक्ष ने अदालत में कहा कि जिन दस्तावेजों की बात (High Court Order) की जा रही है उनके लिए कभी कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई। न ही कर्मचारियों से इस संबंध में कोई संपर्क किया गया था।

अगली सुनवाई की तारीख तय

अदालत ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि संबंधित पत्राचार कर्मचारियों को तय समय तक उपलब्ध कराया जाए। साथ ही कर्मचारियों को दस्तावेज जमा करने की छूट भी दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 19 जून 2026 को होगी।

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