छत्तीसगढ़

Ramavatar Jaggi Murder : सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट सीबीआई की याचिका पर नए सिरे से करे विचार, अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ीं

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से कहा कि वह सीबीआइ की उस याचिका पर नए सिरे से विचार करे जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को 2003 में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी (Ramavatar Jaggi Murder) से जुड़े एक मामले में बरी होने के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी गई है। जग्गी की हत्या चार जून, 2003 को हुई थी और उस वक्त अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे।

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जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सीबीआइ की उस अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें 2011 में हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने अमित जोगी के बरी होने के खिलाफ अपील दायर करने में देरी होने की वजह से सीबीआइ की याचिका को खारिज कर दिया था।

पीठ ने कहा कि हालांकि सीबीआइ ने 1,373 दिनों की देरी के बाद याचिका दायर की, लेकिन यह भी सच है कि प्रतिवादी अमित जोगी के खिलाफ आरोप बहुत गंभीर हैं, जिसमें एक विरोधी राजनीतिक दल के सदस्य की हत्या की साजिश शामिल है। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट को सीबीआइ की याचिका पर अधिक उदार और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था और इसे मेरिट पर परखना चाहिए था।

पीठ ने कहा “हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस तरह के गंभीर आरोपों वाले मामले को केवल तकनीकी कारणों से खारिज नहीं किया जाना चाहिए।” सीबीआइ की याचिका में देरी को स्वीकार करते हुए मामले को नए सिरे से विचार के लिए हाई कोर्ट को भेजा गया है। पीठ ने कहा कि इस मामले में अमित जोगी को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। इस मामले में राज्य और वास्तविक शिकायतकर्ता को भी सीबीआइ की याचिका में पक्षकार बनाया जाएगा।

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इस मामले की पहले राज्य पुलिस द्वारा जांच की गई थी और बाद में इसे सीबीआइ को सौंपा गया था, जिसने अमित जोगी (Ramavatar Jaggi Murder) सहित कई आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। 31 मई, 2007 को एक ट्रायल कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपितों के खिलाफ आरोपों को सफलतापूर्वक साबित किया है। हालांकि, इसने अमित जोगी को आरोपों से बरी कर दिया था।

छत्तीसगढ़ सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन इसकी अपील को खारिज कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने रामावतार जग्गी के पुत्र और शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर याचिका को भी खारिज कर दिया था।

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