Raipur Police Commissionerate : मध्य, पश्चिम और उत्तर में बंटी रायपुर पुलिस कमिश्नरी, कल से लागू होगी राज्य की पहली पुलिस कमिश्नर प्रणाली

Raipur Police Commissionerate

Raipur Police Commissionerate

छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, आधुनिक और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक प्रशासनिक निर्णय लिया है। राजधानी रायपुर में 23 जनवरी से राज्य की पहली पुलिस कमिश्नर प्रणाली (Raipur Police Commissionerate) लागू होने जा रही है।

इसके साथ ही रायपुर पुलिस कमिश्नरी को मध्य, पश्चिम और उत्तर- तीन प्रशासनिक क्षेत्रों में विभाजित कर दिया गया है, ताकि बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार, अपराध नियंत्रण और यातायात प्रबंधन जैसी चुनौतियों का बेहतर समाधान किया जा सके।

यह व्यवस्था मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर के मॉडल पर आधारित बताई जा रही है, जहां शहरी पुलिसिंग को विकेंद्रीकृत कर निर्णय प्रक्रिया को अधिक तेज और प्रभावी बनाया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार का मानना है कि राजधानी रायपुर की जनसंख्या, शहरीकरण की गति और आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए यह बदलाव अब समय की आवश्यकता बन चुका था।

क्यों जरूरी थी पुलिस कमिश्नर प्रणाली

जारी अधिसूचना के अनुसार रायपुर नगर निगम क्षेत्र की अनुमानित जनसंख्या लगभग 19 लाख तक पहुंच चुकी है। लगातार बढ़ती आबादी, नए आवासीय क्षेत्रों का विकास, व्यापारिक गतिविधियों में इजाफा, ट्रैफिक का बढ़ता दबाव और अपराध के नए स्वरूप – इन सभी कारणों से परंपरागत पुलिसिंग ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था।

सरकार का आकलन है कि पुलिस अधीक्षक आधारित प्रणाली में कई बार निर्णय लेने में विलंब होता है, क्योंकि मजिस्ट्रियल शक्तियां अलग प्रशासनिक ढांचे के पास होती हैं। पुलिस कमिश्नर प्रणाली में कानून-व्यवस्था से जुड़े कई अधिकार सीधे पुलिस आयुक्त के पास होने से त्वरित निर्णय संभव हो पाते हैं। इसी सोच के तहत शहरी पुलिस व्यवस्था (Raipur Police Commissionerate) को अधिक सशक्त बनाने का निर्णय लिया गया है।

शहरी और ग्रामीण पुलिसिंग को किया गया अलग

नई व्यवस्था के तहत रायपुर जिले को स्पष्ट रूप से दो हिस्सों – शहरी और ग्रामीण – में बांटा गया है।

रायपुर और बिरगांव नगर निगम क्षेत्र के 21 पुलिस थाने पुलिस कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे।

वहीं बिरगांव नगर निगम क्षेत्र के बाहर और ग्रामीण इलाकों के 12 पुलिस थानों की जिम्मेदारी पहले की तरह पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पास रहेगी।

इस विभाजन का उद्देश्य यह है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को उनकी प्रकृति के अनुसार अलग-अलग रणनीति के तहत हल किया जा सके।

मध्य, पश्चिम और उत्तर – तीन जोन में बंटी कमिश्नरी

रायपुर पुलिस कमिश्नरी को प्रशासनिक सुविधा और प्रभावी निगरानी के लिए तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है – मध्य, पश्चिम और उत्तर।

मध्य क्षेत्र : प्रशासनिक और व्यावसायिक हृदयस्थल

मध्य क्षेत्र को रायपुर शहर का प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्र माना जाता है। यहां कुल सात पुलिस थाने शामिल किए गए हैं।

सहायक पुलिस आयुक्त (सिविल लाइन) के अंतर्गत: सिविल लाइन, देवेंद्रनगर और तेलीबांधा थाना

सहायक पुलिस आयुक्त (कोतवाली) के अंतर्गत: कोतवाली, गंज, मौदहापारा और गोलबाजार थाना

यह क्षेत्र सरकारी कार्यालयों, प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से घिरा हुआ है, जहां कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन दोनों बड़ी चुनौती माने जाते हैं।

पश्चिम क्षेत्र : घनी आबादी और मिश्रित शहरी विस्तार

पश्चिम क्षेत्र में तेजी से विकसित होते आवासीय इलाके और पुरानी बस्तियां शामिल हैं।

सहायक पुलिस आयुक्त (पुरानी बस्ती): पुरानी बस्ती, डीडीनगर, आमानाका

सहायक पुलिस आयुक्त (आजाद चौक): आजाद चौक, सरस्वतीनगर, कबीरनगर

सहायक पुलिस आयुक्त (राजेंद्रनगर): राजेंद्रनगर, मुजगहन और टिकरापारा

इस क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के साथ-साथ सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

उत्तर क्षेत्र : औद्योगिक और नगर निगम विस्तार वाला इलाका

उत्तर क्षेत्र में बिरगांव नगर निगम के अंतर्गत आने वाले इलाके और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।

सहायक पुलिस आयुक्त (उरला): उरला (नगर निगम क्षेत्र), खमतराई, गुढ़ियारी

सहायक पुलिस आयुक्त (पंडरी): पंडरी और खम्हारडीह

यहां औद्योगिक गतिविधियों, मालवाहक यातायात और श्रमिक आबादी के कारण कानून-व्यवस्था की चुनौतियां अलग प्रकृति की हैं।

37 वरिष्ठ अधिकारियों की मजबूत संरचना

नई Raipur Police Commissionerate के तहत कुल 37 वरिष्ठ पुलिस पदों को स्वीकृति दी गई है, जो शहरी पुलिसिंग को बहुस्तरीय और जवाबदेह बनाएंगे।

फैक्ट फाइल:

पुलिस आयुक्त : 1 (आईजी स्तर)

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त : 1 (डीआईजी स्तर)

पुलिस उपायुक्त : 5

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त : 9

सहायक पुलिस आयुक्त : 21

कुल पद : 37

इस संरचना के तहत कानून-व्यवस्था, अपराध, साइबर क्राइम, यातायात, प्रोटोकॉल, प्रशिक्षण और इंटेलिजेंस जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विशेष अधिकारी तैनात किए जाएंगे।

पुलिस आयुक्त को मिले सीमित लेकिन अहम अधिकार

गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार पुलिस कमिश्नर को कुल नौ अधिनियमों के तहत अधिकार प्रदान किए गए हैं। हालांकि शस्त्र लाइसेंस और आबकारी से जुड़े अधिकारों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है, जिसे लेकर पुलिस महकमे में असंतोष भी सामने आया है।

कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र में शामिल अधिनियम:

छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम, 2007

बंदी अधिनियम, 1900

विष अधिनियम, 1919

अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956

मोटर वाहन अधिनियम, 1988

विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967

शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923

पशु अतिचार अधिनियम, 1871

छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990

पहले पुलिस कमिश्नर को लेकर मंथन तेज

राजधानी के पहले पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर शासन स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। वहीं सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा, बिलासपुर रेंज के आईजी संजीव शुक्ला, बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. और आईजी अजय यादव के नामों पर भी विचार किया जा रहा है। संभावना है कि जल्द ही नियुक्ति आदेश जारी किए जाएंगे।

आईएएस-आईपीएस टकराव और ओडिशा मॉडल पर बहस

कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के साथ ही आईएएस और आईपीएस लॉबी के बीच अधिकारों को लेकर टकराव खुलकर सामने आया है। सूत्रों के अनुसार पुलिस अधिकारियों द्वारा मांगे गए कई अधिकारों पर आईएएस लॉबी ने आपत्ति जताई, जिसके चलते अधिकारों में कटौती की गई।

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारियों का कहना है कि ओडिशा मॉडल को नजरअंदाज कर सीमित अधिकारों वाली प्रणाली लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उनका मानना है कि राजधानी पुलिस सुधार (Raipur Police Commissionerate) तभी सफल होगा, जब पुलिस को पर्याप्त प्रशासनिक स्वतंत्रता दी जाए।

राजधानी पुलिसिंग के नए युग की शुरुआत

सरकार और पुलिस प्रशासन का दावा है कि नई व्यवस्था से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी, अपराध नियंत्रण बेहतर होगा और नागरिकों को अधिक सुरक्षित वातावरण मिलेगा। वहीं आलोचकों का मानना है कि सीमित अधिकारों के साथ कमिश्नरी प्रणाली अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल कर पाएगी या नहीं, यह आने वाला समय बताएगा।

फिलहाल इतना तय है कि रायपुर में पुलिसिंग के इतिहास में यह बदलाव एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में पूरे छत्तीसगढ़ की शहरी पुलिस व्यवस्था पर देखने को मिलेगा।