Raipur Literature Festival : शब्दों ने संभाली कमान, महिला रचनाकारों की आवाज़ से गूंज उठा रायपुर साहित्य उत्सव

Raipur Literature Festival

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नवा रायपुर में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव 2026 पूरे उत्साह और साहित्यिक गरिमा के साथ जारी है। उत्सव के अंतर्गत सुरजीत नवदीप मंडप में महिला साहित्यकारों के विशेष काव्य-पाठ सहित काव्य एवं व्यंग्य के कई सत्र आयोजित (Raipur Literature Festival) किए गए, जिनमें प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 90 से अधिक नवोदित एवं समकालीन रचनाकारों ने सहभागिता की।

रायपुर साहित्य महोत्सव के वृहद आयोजन के अंतर्गत जय जोहार साहित्य-संस्कृति संस्थान, छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान एवं छत्तीसगढ़ मित्र के संयुक्त तत्वावधान में महिला साहित्यकारों के विशेष काव्य-पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन जय जोहार साहित्य-संस्कृति संस्थान की अध्यक्ष डॉ. सीमा निगम द्वारा किया (Raipur Literature Festival) गया। इस अवसर पर संस्थान की संरक्षक डॉ. रश्मिलता मिश्रा, श्रीमती शशि सुरेंद्र दुबे एवं छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान की अध्यक्ष श्रीमती शकुंतला तरार विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहीं। मंच संचालन डॉ. सीमा अवस्थी एवं सुमन शर्मा बाजपेयी ने किया।

महिला साहित्यकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, नदियों की महिमा, सामाजिक सरोकार, नारी सशक्तिकरण एवं राष्ट्रभक्ति जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस सत्र में विमला माहेश्वरी, भारती यादव मेधा, पूर्वा श्रीवास्तव, पल्लवी झा, नंदिनी लहेज, दिलशाद सैफी, अनिता झा, अनामिका शर्मा ‘शशि’, प्रमदा ठाकुर, सुषमा प्रेम पटेल, पूर्णिमा तिवारी, शुभ्रा ठाकुर, धरा देवांगन, शकुंतला तिवारी, सीमा पांडेय, डॉ. ज्योति दीवान, डॉ. संध्या रानी शुक्ला, नलिनी बाजपेयी, अंजना भाके ‘कनुप्रिया’, शशि तिवारी, डॉ. तुलेश्वरी धुरंधर, प्रतिमा बनर्जी, दुर्गा पाठक, आभा श्रीवास्तव, मंजूषा अग्रवाल, कल्याणी तिवारी, प्रीति मिश्रा, चंद्र प्रभा दुबे, चंद्रकला त्रिपाठी, अर्चना जैन, खिलेश गौर सहित अनेक साहित्यकारों ने सहभागिता की। आभार प्रदर्शन डॉ. मृणालिका ओझा ने किया।

उत्सव के अंतर्गत सुरजीत नवदीप मंडप में आयोजित अन्य साहित्यिक सत्रों में सामूहिक काव्य-पाठ एवं व्यंग्य प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र (Raipur Literature Festival) रहीं। धमतरी से डूमनलाल ध्रुव के नेतृत्व में 15 सदस्यीय दल ने ग्रामीण एवं लोक संवेदनाओं से जुड़ी कविताएं प्रस्तुत कीं।

रायपुर से राजशेखर चौबे के नेतृत्व में 9 रचनाकारों ने समकालीन विषयों पर व्यंग्यात्मक रचनाएं प्रस्तुत कीं, जबकि महासमुंद से अशोक शर्मा के नेतृत्व में 12 सदस्यीय समूह ने आंचलिक संस्कृति को स्वर दिया। वहीं रायपुर के श्री आशीष सिंघानिया के 7 सदस्यीय समूह ने युवा सोच और नवीन प्रयोगों से युक्त कविताओं का पाठ किया।

दिनभर चले इन सत्रों में साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। प्रत्येक प्रस्तुति पर श्रोताओं की करतल ध्वनि ने रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया। आयोजकों के अनुसार रायपुर साहित्य उत्सव अब एक सांस्कृतिक आयोजन से आगे बढ़कर एक सशक्त बौद्धिक एवं साहित्यिक आंदोलन का रूप ले चुका है, जो छत्तीसगढ़ की साहित्यिक विरासत को निरंतर समृद्ध कर रहा है।