Rail Network Expansion Chhattisgarh : रेल परियोजनाओं से बदलेगा सफर, 22 गुना बढ़ा बजट; 5,755 किमी नए सर्वे से तैयार हो रहा बड़ा रोडमैप
Rail Network Expansion Chhattisgarh
छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क का नक्शा आने वाले कुछ वर्षों में पूरी तरह बदलने वाला है। राज्य के लिए स्वीकृत रेल परियोजनाओं (Rail Network Expansion Chhattisgarh), नई लाइनों, दोहरीकरण और भविष्य की तैयारियों पर केंद्र सरकार ने लोकसभा में विस्तृत जानकारी दी। रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को सदन में बताया कि छत्तीसगढ़ में रेल अवसंरचना को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बीते कुछ वर्षों में अभूतपूर्व निवेश किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में रेल परियोजनाओं और संरक्षा कार्यों के लिए बजट प्रावधान में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2009-2014 के बीच जहां औसत सालाना खर्च करीब 311 करोड़ रुपए तक सीमित था, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए यह बढ़कर 6,925 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यानी पुराने दौर की तुलना में 22 गुना से भी अधिक वृद्धि। इस भारी आवंटन का लक्ष्य है—कनेक्टिविटी बढ़ाना, माल व यात्री ढुलाई की क्षमता में इज़ाफा करना और स्टेशनों व ट्रैक पर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना।
खरसिया से बस्तर तक नई लाइनों से बदलेगा कनेक्टिविटी का चेहरा
मंत्री ने बताया कि राज्य में चल रही प्रमुख नई लाइन और क्षमता विस्तार परियोजनाएं न सिर्फ औद्योगिक क्षेत्रों को, बल्कि दूरस्थ और नक्सल प्रभावित हिस्सों को भी मुख्यधारा के रेल नेटवर्क से जोड़ेंगी।
खरसिया–नया रायपुर–परमालकसा नई लाइन (278 किमी)
लगभग 7,854 करोड़ रुपए लागत वाली यह लाइन राज्य के पूर्वी हिस्से को राजधानी क्षेत्र और आगे मध्य इलाकों से जोड़ेगी। कोयला, उद्योग और प्रशासनिक केंद्रों के बीच आवाजाही और परिवहन दोनों में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
रावघाट–जगदलपुर नई लाइन (140 किमी)
करीब 3,513 करोड़ रुपए की यह परियोजना बस्तर क्षेत्र के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है। नक्सल प्रभावित इलाकों में रेल संपर्क बढ़ने से न सिर्फ आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, बल्कि सुरक्षा और आवागमन की सुविधा भी बेहतर होगी।
गेवरा रोड–पेंड्रा रोड नई लाइन (157 किमी)
3,923 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रही यह लाइन कोयला व खनिज परिवहन को नई रफ्तार देगी। खनन क्षेत्रों से निकलने वाले माल को बड़े औद्योगिक एवं पावर हब्स तक पहुंचाना आसान और कम समय लेने वाला होगा।
खरसिया–परमालकसा 5वीं और 6वीं लाइन (278 किमी)
माल ढुलाई के भारी दबाव को देखते हुए इस खंड में अतिरिक्त दो लाइनों का निर्माण किया जा रहा है। लगभग 7,854 करोड़ रुपए की इस परियोजना के पूरा होने पर लाइन पर चलने वाली मालगाड़ियों की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और ट्रैफिक संकुलन कम होगा।
इसके साथ ही बोरीडांड–अंबिकापुर दोहरीकरण (80 किमी) और बिलासपुर–झारसुगुड़ा चौथी लाइन (206 किमी) जैसी परियोजनाएं भी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं। इनसे उत्तर छत्तीसगढ़, कोयला क्षेत्र और पड़ोसी राज्यों के बीच रेल कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
5,755 किमी के सर्वे से तैयार हो रहा लंबी अवधि का रेल नक्शा
सरकार सिर्फ मौजूदा परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के रेल नेटवर्क के लिए भी विस्तृत रणनीति पर काम चल रहा है। मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों 2022-23 से 2024-25 के दौरान और चालू वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 61 सर्वे कार्य शुरू किए गए हैं।
इन सर्वेक्षणों में लगभग 5,755 किलोमीटर लंबाई शामिल है, जिसमें—
26 नई लाइन परियोजनाओं के सर्वे
35 दोहरीकरण से जुड़ी परियोजनाओं के सर्वे शामिल हैं।
यह सर्वे यह संकेत देता है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों – औद्योगिक क्षेत्र, जनजातीय अंचल, कृषि प्रधान पट्टी और शहरी हब – को जोड़ने के लिए घना और योजनाबद्ध रेल नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।
किन आधारों पर तय होती हैं रेल परियोजनाएं?
रेल मंत्रालय के अनुसार, किसी भी नई रेल लाइन या दोहरीकरण परियोजना को मंजूरी देने से पहले कई अहम मापदंडों का विश्लेषण किया जाता है, जैसे–
प्रस्तावित रूट पर संभावित यातायात अनुमान और उसकी दीर्घकालिक संभावनाएं
परियोजना की लाभप्रदता और निवेश पर रिटर्न
स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर सामाजिक–आर्थिक महत्व
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, कृषि क्षेत्र और शहरों तक पहुँच (फर्स्ट एंड लास्ट माइल कनेक्टिविटी)
पहले से संकुलित लाइनों का बोझ कम करने की आवश्यकता
इन्हीं मानकों के आधार पर छत्तीसगढ़ में परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से स्वीकृत और आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्र सरकार का दावा है कि राज्य की तेज़ आर्थिक वृद्धि और लॉजिस्टिक सुविधा के लिए रेल सेक्टर को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा गया है।
विकास, उद्योग और यात्रियों—तीनों के लिए फायदेमंद
बढ़ा हुआ बजट, नई लाइनें, दोहरीकरण और हजारों किलोमीटर के सर्वे—ये सब संकेत दे रहे हैं कि अगले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ का रेल नेटवर्क सिर्फ लंबाई में नहीं, बल्कि गुणवत्ता और क्षमता में भी कई गुना बढ़ेगा। इससे—
उद्योगों को कच्चा माल और तैयार माल भेजने में समय और लागत की बचत,
दूरदराज के जिलों के यात्रियों के लिए बेहतर ट्रेन विकल्प,
और नए बाजारों व रोजगार के अवसरों तक आसान पहुंच संभव होगी।
राज्य के लिए तैयार हो रहा यह रेल रोडमैप आने वाले समय में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ आम लोगों के रोजमर्रा के सफर को भी नई दिशा दे सकता है।
