प्रयागराज में सुबह से ही अदालत के बाहर हलचल कुछ ज्यादा (Rahul Gandhi Relief) थी। लोग आपस में चर्चा करते दिखे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि राहुल गांधी को इस मामले में राहत मिल गई। वकीलों के बीच भी बातचीत का दौर तेज था, हर कोई फैसले के पीछे की वजह समझने की कोशिश करता नजर आया। माहौल ऐसा था जैसे किसी बड़े मोड़ का इंतजार खत्म हुआ हो।
दूसरी ओर आम लोगों में भी इस फैसले को लेकर उत्सुकता कम नहीं थी। शहर की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक यही सवाल घूमता रहा कि क्या अदालत ने सिर्फ कानूनी आधार पर फैसला दिया या इसमें और भी कई पहलुओं को देखा गया। लोग अपने-अपने अंदाज में इस फैसले को जोड़कर समझने की कोशिश करते रहे।
याचिका क्यों खारिज हुई (Rahul Gandhi Relief)
इसी क्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। सिंगल बेंच ने इस पूरे मामले पर सुनवाई के बाद साफ किया कि इस तरह का निर्देश देने का आधार नहीं बनता। यह याचिका एक महिला की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें अदालत से अनुरोध किया गया था कि राहुल गांधी के बयान को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाए।
पहले सुरक्षित रखा गया था फैसला
इससे पहले अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 8 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख (Rahul Gandhi Relief) लिया था। याचिकाकर्ता और राज्य पक्ष के वकीलों ने अपने-अपने तर्क रखे थे, जिसके बाद कोर्ट ने पूरे मामले पर विचार किया। अब उसी पर निर्णय देते हुए अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और किसी तरह का निर्देश देने से इंकार कर दिया।
विवाद की जड़ क्या थी
दरअसल मामला उस बयान से जुड़ा है जिसमें राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि उनकी लड़ाई भाजपा, आरएसएस और केंद्र सरकार के खिलाफ है। इस टिप्पणी को लेकर विवाद (Rahul Gandhi Relief) खड़ा हुआ और इसे लेकर आपत्ति जताई गई। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस तरह की बात से लोगों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं और यह बयान गंभीर प्रकृति का है।
निचली अदालत के फैसले को दी गई थी चुनौती
पहले संभल की अदालत ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद उसी फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया था। याचिकाकर्ता का मानना था कि इस बयान के पीछे देश को अस्थिर करने की मंशा झलकती है, इसलिए इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल राहत, लेकिन बहस जारी
अब हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी को फिलहाल राहत (Rahul Gandhi Relief) मिल गई है। हालांकि इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस अभी भी जारी है और आने वाले समय में इस तरह के मामलों पर चर्चा और तेज हो सकती है।
