दिल्ली में सुबह से ही माहौल कुछ अलग था। राजनीतिक हलकों में लोगों के चेहरे पर सवाल साफ दिख रहे थे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि पवन खेड़ा को इतनी जल्दी राहत (Pawan Khera Bail) गई। कोई इसे कानूनी मोड़ बता रहा था तो कोई इसे राजनीति का असर मान रहा था। बातचीत का दौर लगातार चल रहा था और हर किसी के पास अपनी-अपनी राय थी।
वहीं दूसरी तरफ आम लोग भी इस पूरे मामले को लेकर उत्सुक नजर आए। चाय की दुकानों पर चर्चा तेज थी, सोशल मीडिया पर बहस चल रही थी। लोग यही समझने की कोशिश कर रहे थे कि क्या यह फैसला सिर्फ अदालत की नजर से लिया गया है या इसके पीछे राजनीतिक खींचतान भी उतनी ही अहम रही है।
हाईकोर्ट के फैसले को क्यों बदला गया (Pawan Khera Bail)
इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को बदल दिया जिसमें अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी गई थी। जस्टिस जे के माहेश्वरी और ए एस चंदुरकर की पीठ ने कहा कि पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की झलक दिखाई देती है। ऐसे में व्यक्ति की स्वतंत्रता को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
बयानबाजी को लेकर दोनों पक्षों पर टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को लेकर अपनी बात रखी। पहली नजर में यह माना गया कि दिए गए बयान राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से हो सकते (Pawan Khera Bail) यानी बयान सिर्फ सामान्य नहीं बल्कि रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
साथ ही यह भी कहा गया कि दूसरी ओर से भी जो प्रतिक्रिया आई, उसकी भाषा मर्यादित नहीं थी। सार्वजनिक जीवन में शब्दों का चयन बहुत अहम होता है, इस पर भी अदालत ने ध्यान दिलाया।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई
पूरा मामला उस प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी को लेकर आरोप लगाए थे। उन्होंने विदेशी पासपोर्ट और संपत्ति से जुड़े दावे किए थे, जिसके बाद मामला तेजी से बढ़ा और पुलिस ने केस दर्ज किया।
अपने बचाव में क्या कहा गया
याचिका में यह कहा गया कि बयान राजनीतिक संदर्भ में दिए गए थे और उन्हें अलग तरीके से पेश किया गया। यह भी तर्क रखा गया कि पूरे बयान की बजाय कुछ हिस्सों को चुनकर कार्रवाई की गई। दूसरी तरफ आरोपों को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया गया और कहा गया कि मामले को हल्के में नहीं लिया (Pawan Khera Bail)सकता।
फिलहाल गिरफ्तारी से राहत
अब अदालत के इस फैसले के बाद पवन खेड़ा को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। जांच के दौरान उन्हें कानूनी सुरक्षा मिलेगी, लेकिन मामला अभी जारी रहेगा और आगे की सुनवाई में ही इसकी अगली दिशा तय होगी।
