PWD Secretary Action Balrampur : पीडब्ल्यूडी सचिव ने कार्यों की धीमी गति पर जताई नाराजगी, लापरवाह ठेकेदारों को ब्लैक-लिस्ट करने के सख्त निर्देश

छत्तीसगढ़ में सरकारी निर्माण कार्यों की कछुआ चाल और ठेकेदारों की मनमानी पर अब शासन ने बेहद कड़ा और दंडात्मक रुख अपना लिया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज अपने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के मैदानी प्रवास के दौरान विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। सचिव ने दोटूक शब्दों में अफसरों से कहा कि तय समय-सीमा के भीतर काम पूरा न करने वाले और निर्माण में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए और इसके बाद भी सुधार न होने पर उन्हें सीधे ‘ब्लैक-लिस्ट’ (काली सूची में डालना) करने की दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

सर्किट हाउस में जुटी अफसरों की फौज, एक-एक प्रोजेक्ट की हुई समीक्षा

बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), सेतु (ब्रिज) निर्माण, सड़क एवं भवन निर्माण तथा विद्युत एवं यांत्रिकी (E&M) विंग के सभी छोटे-बड़े अधिकारी शामिल हुए। बैठक में सचिव बंसल के साथ बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी, वनमण्डलाधिकारी (DFO) आलोक बाजपेई और पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता (CE) वी.के. भतपहरी विशेष रूप से मौजूद रहे।

सचिव मुकेश कुमार बंसल ने जिले में चल रही सड़कों, सरकारी भवनों, पुल-पुलियों और कॉलेज बिल्डिंग्स की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने कड़े लहजे में कहा, “जनता से जुड़े निर्माण कार्यों में किसी भी स्तर पर शिथिलता या लेट-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर एक प्रोजेक्ट की अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करनी होगी और ठेकेदारों के साथ सतत समन्वय बनाकर बंद पड़े कामों को तत्काल गति देनी होगी।”

इन प्रमुख मार्गों और सरकारी भवनों के काम की हुई स्क्रूटनी

बैठक के दौरान सचिव ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की जीवन रेखा मानी जाने वाली कई महत्वपूर्ण सड़कों के पेंडिंग और अधूरे पड़े कार्यों की कुंडली खंगाली। इनमें मुख्य रूप से:

बलरामपुर-रामानुजगंज-सनावल मार्ग

कामेश्वरनगर, कपिलदेवपुर और गणेशमोड़ सड़कें

जनकपुर तथा रमेशपुर-शंकरपुर मार्ग

चंपा-बाद और कुसमी-कोरंधा मार्ग के निर्माण कार्य

इसके अलावा जिले में विभिन्न विभागों के प्रशासनिक भवनों, अधोसंरचना परियोजनाओं और शासकीय महाविद्यालय (Government College) भवन के निर्माण कार्यों की कछुआ चाल पर उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय की। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता वाले इन जनहितैषी कार्यों को समय पर पूरा करना संबंधित इंजीनियर्स और निर्माण एजेंसियों की नैतिक व कानूनी जिम्मेदारी है।

एनएच-343 और कंठी घाट का किया औचक निरीक्षण

बैठक खत्म होने के तुरंत बाद पीडब्ल्यूडी सचिव मुकेश कुमार बंसल अधिकारियों की टीम को लेकर सीधे ग्राउंड जीरो पर निरीक्षण के लिए निकल पड़े। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-343 (NH-343) और पहाड़ी व दुर्गम इलाके ‘कंठी घाट’ में निर्माणाधीन सड़क पैच का बारीकी से मुआयना किया।

बारिश से पहले जल निकासी दुरुस्त करने का अल्टीमेटम

मानसून की दस्तक को देखते हुए सचिव ने एनएच-343 के किनारे बन रहे ड्रेनेज सिस्टम को देखा। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि पहली मूसलाधार बारिश होने से पहले नाली निर्माण और जल निकासी की सभी रुकावटों को शत-प्रतिशत दूर कर लिया जाए, ताकि बरसात के मौसम में सड़कों पर पानी न भरे, मिट्टी का कटाव न हो और घाट पर आवागमन करने वाले आम राहगीरों को किसी भी तरह की असुविधा या दुर्घटना का सामना न करना पड़े।

सड़क सुरक्षा से समझौता नहीं

उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़कों और बड़े पुलों के निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग की गुणवत्ता तथा ‘रोड सेफ्टी’ (सड़क सुरक्षा) के वैश्विक मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए। अंधा मोड़, रैलिंग और साइन बोर्ड जैसे सुरक्षात्मक कार्य अनिवार्य रूप से किए जाएं।

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