Private Hospitals Deadline : आयुष्मान पोर्टल पर निजी अस्पतालों को दो दिन की राहत, डॉक्टरों के साथ स्टाफ संख्या अपलोड करना भी अनिवार्य

Private Hospitals Deadline

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आयुष्मान भारत योजना से जुड़े नए पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने के लिए छत्तीसगढ़ के निजी अस्पतालों को राज्य सरकार ने एक बार फिर सीमित राहत (Private Hospitals Deadline) दी है। निजी अस्पताल प्रबंधन को अब दो दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है और 15 फरवरी तक सभी आवश्यक दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि यह अंतिम मौका है, इसके बाद किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।

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स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार, अब केवल डॉक्टरों की जानकारी ही नहीं, बल्कि अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल और अन्य कर्मचारियों की संख्या भी पोर्टल पर दर्ज करना जरूरी होगा। तय समय-सीमा के भीतर मांगी गई सभी जानकारियां नए आयुष्मान पोर्टल पर अपलोड नहीं करने वाले अस्पतालों की सूची पर कार्रवाई की जा सकती है।

पहले यह डेडलाइन 13 फरवरी तय की गई थी, लेकिन उस दिन तक राजधानी रायपुर में केवल करीब एक दर्जन निजी अस्पताल प्रबंधन ही आवश्यक दस्तावेज और लैपटॉप के साथ सीएमओ कार्यालय पहुंचे थे। यही स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों (Private Hospitals Deadline) में भी देखने को मिली। निजी अस्पतालों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा आयुष्मान योजना के नए पोर्टल में किए गए बदलावों के बाद दस्तावेजों की संख्या और तकनीकी प्रक्रिया दोनों ही पहले से कहीं ज्यादा जटिल हो गई हैं।

कई अस्पतालों ने शिकायत की है कि एक-एक दस्तावेज को अलग-अलग पोर्टल सेक्शन में अपलोड करने में काफी समय लग रहा है। इसके साथ ही नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं के कारण कुछ अस्पतालों के दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड ही नहीं हो पा रहे हैं। इन दिक्कतों की जानकारी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य मुख्यालय को भेजी गई थी।

तकनीकी समस्याओं और अस्पताल प्रबंधन की मांग को देखते हुए स्वास्थ्य मुख्यालय ने आयुष्मान पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने के लिए दो दिन का अतिरिक्त समय (Private Hospitals Deadline) देने का निर्णय लिया है। नई समय-सीमा के अनुसार, 15 फरवरी तक सभी निजी अस्पतालों को जरूरी दस्तावेज और विवरण पोर्टल पर अपलोड करना होगा।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के संचालन और निगरानी को सख्त बनाने के उद्देश्य से नए पोर्टल में कई पुराने मापदंडों में बदलाव किया है। अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर, डॉक्टरों की उपलब्धता और अब स्टाफ की संख्या को लेकर नई शर्तें जोड़ी गई हैं। इन शर्तों को पूरा करना प्रदेश के कई छोटे और मझोले अस्पतालों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कड़े नियमों के चलते कई निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से बाहर हो सकते हैं।

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