Editorial: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर एसआईटी की जांच के बाद जो नये नये खुलासे हो रहे हैं। उसे लेकर अब सियासत भी तेज होती जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से महासचिव चंपत राय का त्याग पत्र मंजूर होने के बाद अब इस मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां भी बढ़ गई हैं। खासतौर पर समाजवादी पार्टी चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर लगातार हमलावार रूख अख्तियार किये हुए है। सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव के अलावा समाजवादी पार्टी के अन्य नेता भी इसे लेकर निशाना साध रहे हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी आरोपों की बौछार करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर लगातार बयानबाजी जारी रखी हुई है।
कांग्रेस नेत्री सुप्रिया श्रीनेत्र ने तो अब सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ही हमला बोल दिया है। उन्होंने कहा है कि अयोध्याा में श्रीराम मंदिर पीएम मोदी ने किया था। इसका उदघाटन भी उन्होंने किया वहां कलश की स्थापना भी उन्होंने की थी। मंदिर के संचालन के लिए उन्होंने ही ट्रस्ट बनवाया था और आज जब चढ़ावा चोरी में उस ट्रस्ट के करता धरता की भूमिका ही संदिग्ध पाई जा रही है तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मादी क्यों चुप हैं। जाहिर है चढ़ावा चोरी प्रकरण ने विपक्षी नेताओं को भाजपा, आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद पर निशाना साधने का सुनहरा मौका दे दिया है और वे इसे भला क्यों गवांयेगें। सीधी सी बात है कि विपक्षी पार्टियां आगामी उत्तप्रदेश विधानसभा चुनाव में इसका राजनीतिक फायदा उठाने की हर संभव कोशिश करेंगे। इसमें कोई हर्ज भी नहंी है।
यदि आज भाजपा सत्ता में होती और किसी विपक्षी पार्टी शासित राज्य में ऐसी घटना होती तो वह भी इसे लेकर राजनीति जरूर करती। अब आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद को तो सफाई देनी ही पड़ेगी कि आखिरकार ट्रस्ट के प्रमुख कर्ता धरता चंपत राय के ठीक नाक के नीचे यह चोरी आखिर लंबे समय तक कैसे चलती रही। उनको सिर्फ पद से हटाया जाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनकी जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए। गौरतलब है कि चंपत राय ने पद से हटने के बाद रामभक्तों के नाम एक चिटठ्ी जारी की है जिसमें उन्होंने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा है कि वे चार दशकों से श्रीराम मंदिर निर्माण से लेकर वहां की व्यवस्था के काम में जुटेे रहे हैं और उनका जीवन खुली किताब रहा है।
उनके ऊपर व्यक्तिगत रूप से निराधार आरोप लगाये जा रहे हैं। जिसका जवाब वे एसआईटी की अंतिम रिर्पोट सामने आने के बाद ही देंगे। बहरहाल चंपत राय की भूमिका को लेकर तो एसआईटी ने भी सवाल खड़े किये हैं और संभवत: इसका जवाब उन्हें एसआईटी की जांच के दौरान देना भी पड़ेगा। इस चढ़ावा चोरी प्रकरण ने भाजपा की पेशानी पर बल डाल दिया है क्योंकि कुछ माह बाद ही उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं।
वैसे तो उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विपक्ष के तमाम आरोपों का जवाब दे रहे हैं और उल्टे विपक्ष पर ही हमला करके विपक्ष के हथियार की धार को कुंद करने की कोशिश कर रहे हैं उन्होंने कहा है कि जिन लोगों की भगवान श्रीराम में आस्था ही नहीं थी और जो अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण का विरोध करते थे यहां तक की जिन लोगों ने रामभक्तों पर गोलियां चलाई थी वे अब खुद को रामभक्त बता रहे हैं। रंग बदलने के मामले में तो उन्होंने गिरगिट को भी मात दे दी है। वे इस तरह की अनरगल बयानबाजी कर हिन्दुओं की एकता को तोडना चाहते हैं किन्तु उनके मनसूबे कामयाब नहीं होंगे। देखना होगा कि इस मामले को लेकर हो रही सियासत क्या रंग लाती है।
