छत्तीसगढ़

PMGSY Road Controversy : कोयलारी-मोदिया पथरा सड़क पर सियासी संग्राम, गुणवत्ता बनाम तोड़फोड़ के आरोपों के बीच युवा कांग्रेस नेता समेत चार पर एफआईआर

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बन रही कोयलारी-मोदिया पथरा सड़क अब महज एक विकास परियोजना नहीं (PMGSY Road Controversy) रह गई है। निर्माणाधीन डामरीकृत सड़क को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने के मामले में युवा कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष तुकाराम चंद्रवंशी सहित चार–पांच लोगों के खिलाफ थाना तरेगांव जंगल में एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है।

PMGSY Road Controversy
PMGSY Road Controversy

परियोजना क्रियान्वयन इकाई, कवर्धा के सहायक अभियंता गौरव त्यागी की लिखित शिकायत पर कार्रवाई की गई। शिकायत में आरोप है कि निर्माणाधीन सड़क को दो स्थानों पर औजारों से खोदकर नुकसान पहुंचाया गया, जिससे लगभग 99,474 रुपये की शासकीय क्षति हुई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की संबंधित धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, स्थल निरीक्षण और विभागीय प्रतिवेदन के आधार पर प्रकरण पंजीबद्ध किया (PMGSY Road Controversy) गया है। जांच के दौरान तकनीकी रिपोर्ट, निर्माण मानक और मौके पर उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी को निर्माण गुणवत्ता या प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसके लिए वैधानिक मंच उपलब्ध हैं; स्वयं निर्माण कार्य में हस्तक्षेप करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।

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दूसरी ओर तुकाराम चंद्रवंशी ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे जनहित का मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और वन अनुमति को लेकर सवाल उठाए थे, न कि तोड़फोड़ की। उनके अनुसार, यदि संबंधित भूमि पर फॉरेस्ट क्लीयरेंस है तो दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं, और यदि नहीं है तो निर्माण की वैधता स्पष्ट की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया में उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े होते हैं।

मामले ने ग्रामीणों को भी असमंजस में डाल दिया है। कोयलारी और मोदिया पथरा क्षेत्र के लोगों के लिए यह सड़क आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं और बाजार तक पहुंच की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें सड़क चाहिए, विवाद नहीं। वे चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष हो और निर्माण कार्य बिना अनावश्यक विलंब के पूरा किया जाए।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत और ग्रामीण विकास से जुड़े प्रोजेक्ट अक्सर स्थानीय स्तर पर संवेदनशील मुद्दे (PMGSY Road Controversy) बन जाते हैं, खासकर तब जब गुणवत्ता, अनुमति या पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। एक पक्ष सरकारी संपत्ति को नुकसान की बात कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे घटिया निर्माण और अनुमति से जुड़ा जनहित का प्रश्न बता रहा है।

अब सबकी निगाहें पुलिस विवेचना और विभागीय रिपोर्ट पर टिकी हैं। यही तय करेगा कि यह प्रकरण सुनियोजित तोड़फोड़ का है या निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवालों की परिणति, और अंततः जिम्मेदारी किस पर तय होती है।

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