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PLI Scheme India : PLI योजना से मैन्युफैक्चरिंग को नई ताकत, कंपनियों को मिले 28,748 करोड़ रुपये, निवेश और रोजगार में बड़ा उछाल

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना अब ठोस परिणाम (PLI Scheme India) देने लगी है। केंद्र सरकार ने दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटोमोबाइल और दूरसंचार समेत 14 प्रमुख क्षेत्रों में कंपनियों को कुल 28,748 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन वितरित किया है। इस पहल का मकसद भारत को उत्पादन और निर्यात का बड़ा केंद्र बनाना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और रोजगार के अवसर बढ़ें।

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सरकार द्वारा 2021 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कुल 1.97 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अब तक योजना के तहत 836 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें कंपनियों ने लगभग 2.16 लाख करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इस निवेश का असर उत्पादन और निर्यात दोनों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिससे भारत की औद्योगिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

PLI योजना के तहत शामिल क्षेत्रों ने अब तक 20.41 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री और 8.3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निर्यात (PLI Scheme India) किया है। इसके साथ ही इस पहल ने 14.39 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योजना केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति दे रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में इस योजना का प्रभाव विशेष रूप से दिखाई दिया है। मोबाइल फोन निर्माण में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आयात में करीब 77 प्रतिशत की कमी आई है। अब देश में केवल असेंबली ही नहीं, बल्कि प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, बैटरी, कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल जैसे महत्वपूर्ण घटकों का निर्माण भी शुरू हो गया है, जिससे सप्लाई चेन मजबूत हुई है।

फार्मास्यूटिकल और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में भी योजना ने अहम भूमिका निभाई है। पहली बार 191 बल्क ड्रग्स का घरेलू उत्पादन संभव हुआ है, जिससे आयात निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और उन्नत तकनीकों में निवेश बढ़ा है, जिससे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप उद्योग को तैयार किया जा रहा है।

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दूरसंचार और नेटवर्किंग उपकरणों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। इस क्षेत्र में बिक्री आधार वर्ष की तुलना में छह गुना से अधिक बढ़ी है और निर्यात बढ़कर 21,033 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। खाद्य प्रसंस्करण और विशेष स्टील जैसे क्षेत्रों में भी निवेश और उत्पादन क्षमता में तेजी आई है, जिससे स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिली है।

इसके अलावा, सौर ऊर्जा क्षेत्र में 48 गीगावाट की एकीकृत सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने का लक्ष्य (PLI Scheme India) रखा गया है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता दोनों को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि PLI योजना आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ को गति देने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर रही है और उद्योगों को दीर्घकालिक विकास के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

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