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Piprahwa Relics Exhibition : पूरी मानवता के लिए है बुद्ध का ज्ञान : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन’ का विधिवत उद्घाटन किया और इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

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अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध का ज्ञान और उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग किसी एक कालखंड या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए शाश्वत और सार्वकालिक है। इस ऐतिहासिक अवसर पर (Piprahwa Relics Exhibition) को वैश्विक शांति और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ते हुए उन्होंने इसे भारत की आध्यात्मिक विरासत का गौरवशाली प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते कुछ महीनों में भगवान बुद्ध से जुड़े पावन अवशेष जिन-जिन देशों में प्रदर्शित किए गए, वहां आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक सम्मान का अभूतपूर्व सैलाब देखने को मिला।

यह दर्शाता है कि बुद्ध का संदेश सीमाओं से परे है और आज भी करोड़ों लोगों के जीवन को दिशा देने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि (Piprahwa Relics Exhibition) केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, करुणा और सह-अस्तित्व का वैश्विक संवाद है।

अपने अनुभव साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “यहां आने से पहले मैंने स्वयं इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी को देखा। भगवान बुद्ध के पवित्र रेलिक्स को अपने बीच पाकर हम सभी स्वयं को धन्य अनुभव करते हैं।” उन्होंने इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि इन पवित्र अवशेषों का भारत से बाहर जाना और फिर लंबे अंतराल के बाद वापस लौटना अपने आप में एक गहरा संदेश देता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी केवल आर्थिक या राजनीतिक नहीं होती, बल्कि वह हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी नुकसान पहुंचाती है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के साथ भी यही हुआ, जिन्हें भारत से छीन लिया गया और जो लगभग 125 वर्षों तक देश से बाहर रहे। यह प्रसंग (Piprahwa Relics Exhibition) के माध्यम से इतिहास से सीख लेने का अवसर भी प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपने लिए भी विशेष क्षण बताते हुए कहा कि वर्ष 2026 का उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम भगवान बुद्ध के चरणों से प्रारंभ होना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

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उन्होंने कामना की कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद से वर्ष 2026 पूरी दुनिया के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव का नया दौर लेकर आए। उन्होंने कहा कि आज के अशांत वैश्विक परिदृश्य में बुद्ध का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है और (Piprahwa Relics Exhibition) उसी संदेश को विश्व के सामने पुनः स्थापित करने का सशक्त माध्यम है।

इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के ये पवित्र रत्न उस जीवंत परंपरा से जुड़े हैं, जो करुणा, विवेक, विवेकपूर्ण ज्ञान और संतुलन को भारतीय चेतना में गहराई से स्थापित करती है।

उनके अनुसार भगवान बुद्ध का दर्शन भारत की अनूठी आत्मा का दर्शन है, जो सहिष्णुता और मानव कल्याण की भावना से ओतप्रोत है। उन्होंने कहा कि (Piprahwa Relics Exhibition) भारत की उसी आध्यात्मिक चेतना को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर रही है।

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