अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया गिरावट के बाद लोगों को उम्मीद (Petrol-Diesel Price) थी कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में जल्द राहत मिल सकती है। कई दिनों से ईंधन कीमतों को लेकर चर्चा चल रही थी और आम उपभोक्ता भी कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन सरकार की ओर से आए ताजा बयान ने साफ कर दिया है कि राहत के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें घटने और घरेलू बाजार में ईंधन सस्ता होने के बीच कई प्रक्रियाएं जुड़ी होती हैं। यही कारण है कि वैश्विक बाजार में गिरावट का असर तुरंत पेट्रोल पंपों तक नहीं पहुंचता। सरकार का कहना है कि कीमतों को सामान्य होने में कुछ समय लगेगा।
सरकार ने क्यों रोकी तत्काल राहत की उम्मीद : Petrol-Diesel Price
केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने का अर्थ यह नहीं है कि देश में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत घट जाएंगे।
उन्होंने बताया कि घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतें कई बाजार आधारित और लॉजिस्टिक कारकों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। इसलिए वैश्विक कीमतों में आई गिरावट का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लगना स्वाभाविक है।
सामान्य होने में लगेगा वक्त
नई दिल्ली में पत्रकारों से चर्चा के दौरान सुरेश गोपी ने हाल में हुई 3.94 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कीमतों में वृद्धि का असर जनता पर पड़ा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी गिरावट आते ही उसे तुरंत वापस लेना संभव नहीं है।
उन्होंने बताया कि विदेशों से खरीदा गया कच्चा तेल समुद्री मार्ग से भारत तक पहुंचता है। वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की आवाजाही अधिक होने के कारण आपूर्ति प्रक्रिया में समय लग रहा है। इसी वजह से घरेलू बाजार में स्थिति सामान्य होने में कुछ वक्त लगेगा।
तेल कंपनियों पर भी पड़ा दबाव
राज्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उतार चढ़ाव देखने को मिला (Petrol-Diesel Price) था। इसका असर भारतीय तेल विपणन कंपनियों पर भी पड़ा। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि बढ़ी हुई कीमतों का पूरा बोझ आम लोगों पर न पड़े। इसके लिए लागत का एक बड़ा हिस्सा सरकार ने स्वयं वहन किया।
सरकार को हुआ 12 हजार करोड़ का नुकसान
सुरेश गोपी के अनुसार कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर कम करने के लिए केंद्र सरकार को लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों को भी आर्थिक रूप से संतुलित रखना जरूरी है। साथ ही सरकार को विकास कार्यों और सार्वजनिक सेवाओं के लिए राजस्व की आवश्यकता होती है।
ब्रेंट क्रूड में आई बड़ी गिरावट
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 1.64 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके बाद इसकी कीमत घटकर लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट का पूरा लाभ भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचने में अभी कुछ समय लग सकता है।
एलपीजी और पेट्रोल डीजल का पर्याप्त भंडार
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया है कि देश में ईंधन और रसोई गैस की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य (Petrol-Diesel Price) बनी हुई है। पिछले तीन दिनों में 1.36 करोड़ सिलिंडरों की बुकिंग के मुकाबले 1.47 करोड़ घरेलू एलपीजी सिलिंडरों की डिलीवरी की गई है। वहीं मार्च से अब तक लगभग 10.02 लाख नए पीएनजी कनेक्शन शुरू किए जा चुके हैं।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। ऐसे में लोगों को घबराकर अतिरिक्त खरीदारी करने की जरूरत नहीं है।
