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Passenger Vehicle Growth India : तेजी के बाद संतुलन, अगले वित्त वर्ष 3-6% की रफ्तार से बढ़ सकती है ऑटो उद्योग की थोक बिक्री

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में जिस तेज़ी (Passenger Vehicle Growth India) का अनुभव किया, उसके बाद अब वृद्धि दर के सामान्य स्तर पर लौटने की संभावना जताई जा रही है। घरेलू रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में ऑटो उद्योग की थोक बिक्री 3 से 6 प्रतिशत के दायरे में बढ़ सकती है।

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एजेंसी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के पहले हिस्से में मांग अपेक्षाकृत धीमी रही, लेकिन दूसरी छमाही में जीएसटी से जुड़े सुधार, बेहतर ग्रामीण मांग और अनुकूल वित्तपोषण माहौल ने बिक्री को मजबूत सहारा दिया। इसी वजह से हाल के महीनों में थोक बिक्री के आंकड़े तेज़ी से उभरे। हालांकि, उच्च आधार और बढ़े हुए इन्वेंटरी स्तर को देखते हुए अगले वर्ष वृद्धि दर मध्यम रहने की उम्मीद है।

यात्री वाहन खंड में 2026-27 के दौरान 4-6 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का अनुमान है। उपभोक्ता मांग, नए मॉडल लॉन्च और यूटिलिटी वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता इस खंड को सहारा (Passenger Vehicle Growth India) दे सकती है। वहीं दोपहिया उद्योग, जिसने चालू वित्त वर्ष में 6-9 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान दर्ज किया है, अगले वर्ष 3-5 प्रतिशत की सामान्य वृद्धि की ओर बढ़ सकता है। ग्रामीण आय में सुधार और कृषि उत्पादन का बेहतर प्रदर्शन दोपहिया बिक्री के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

वाणिज्यिक वाहन खंड में भी 4-6 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना जताई गई है। आर्थिक गतिविधियों में तेजी और बस सेगमेंट में स्वस्थ संभावनाएं इस श्रेणी की मांग को समर्थन दे सकती हैं। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि थोक बिक्री पहले ही मजबूत स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे अगले वित्त वर्ष में तेज उछाल की संभावना सीमित हो सकती है।

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आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीकुमार कृष्णमूर्ति के अनुसार, भारतीय ऑटो उद्योग इस समय उपभोक्ता प्राथमिकताओं में बदलाव, तकनीकी नवाचार और स्थिरता के बढ़ते फोकस के बीच नए संतुलन की तलाश में है। इलेक्ट्रिफिकेशन, डिजिटल फीचर्स और बेहतर ईंधन दक्षता जैसे कारक आने वाले समय में प्रतिस्पर्धा की दिशा तय करेंगे।

समग्र रूप से देखें तो 2026-27 में ऑटो उद्योग की वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन यह रफ्तार अब संतुलित और टिकाऊ स्वरूप (Passenger Vehicle Growth India) में दिखाई देगी। मांग का आधार मजबूत है, परंतु उद्योग को उच्च उत्पादन स्तर और लागत प्रबंधन के बीच संतुलन साधना होगा।

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