Parliament Special Session 2026 : महिला आरक्षण और परिसीमन पर आर-पार, शशि थरूर ने परिसीमन को बताया ‘राजनीतिक नोटबंदी’

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आज का दिन बेहद निर्णायक साबित होने जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में आज ‘महिला आरक्षण’ और ‘परिसीमन’ से जुड़े तीन महत्वपूर्ण (Parliament Special Session 2026) विधेयकों पर वोटिंग होनी है। जहां सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बता रही है,
वहीं विपक्ष ने परिसीमन के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए इसे देश के संघीय ढांचे के लिए खतरा करार दिया है। सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर का बयान चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जिसमें उन्होंने परिसीमन की तुलना ‘पॉलिटिकल डिमॉनिटाइजेशन’ (राजनीतिक नोटबंदी) से कर दी है।
शशि थरूर का तीखा हमला, ‘काम करने वाले राज्यों को मिलेगी सजा’ (Parliament Special Session 2026)
लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने परिसीमन विधेयक पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि परिसीमन एक तरह की ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा। थरूर का तर्क है कि जिन राज्यों (विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों) ने जनसंख्या नियंत्रण के सरकारी निर्देशों का पालन किया और खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया,
परिसीमन लागू होने से उनकी राजनैतिक ताकत कम हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जनसंख्या बढ़ाने वाले राज्यों के हाथ में देश का पूरा नियंत्रण सौंपना उन राज्यों के साथ अन्याय है जिन्होंने आबादी रोकी है।
महिलाओं को ‘ह्यूमन शील्ड’ बना रही सरकार: कनिमोझी
डीएमके (DMK) सांसद कनिमोझी ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण को परिसीमन की शर्त के साथ जोड़कर महिलाओं को एक तरह से ‘ह्यूमन शील्ड’ की तरह इस्तेमाल (Parliament Special Session 2026) कर रही है।
कनिमोझी का सवाल था कि यदि सरकार वास्तव में आरक्षण देना चाहती है, तो वह वर्तमान 543 सीटों के आधार पर तत्काल इसे लागू क्यों नहीं करती? उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्यों को इस प्रक्रिया से भारी नुकसान होगा, क्योंकि वहां आबादी कम है।
आधी रात को नोटिफिकेशन पर मचा बवाल
संसद में चर्चा के बीच ही केंद्र सरकार द्वारा गुरुवार रात 10 बजे महिला आरक्षण अधिनियम को नोटिफाई करने के फैसले पर भी विपक्ष भड़क गया है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल और कनिमोझी ने कहा कि जब सदन में बिल पर बहस चल रही है,
तब आधी रात को नोटिफिकेशन जारी करना सदन की गरिमा का अपमान है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल चुनावी लाभ के लिए जल्दबाजी दिखा रही है, जबकि वास्तविकता में आरक्षण को 2029 तक के लिए टाल दिया गया है।
प्रधानमंत्री की अपील, ‘राजनीति के तराजू में न तौलें’
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी दलों से इन विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित करने की भावुक (Parliament Special Session 2026) अपील की है। पीएम मोदी ने विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि सीटों की संख्या में वृद्धि उसी अनुपात में होगी जो पहले से चला आ रहा है, इसलिए किसी राज्य को डरने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि जो दल इस ऐतिहासिक सुधार का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में इसकी बड़ी राजनैतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रधानमंत्री ने यह भी साफ किया कि वह इस बिल का श्रेय विपक्षी दलों को भी देने के लिए तैयार हैं, बस इसे राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।
वोटिंग का गणित, दो-तिहाई बहुमत की चुनौती
आज संसद में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक और संघ राज्य विधि संशोधन विधेयक पर मतदान (Parliament Special Session 2026) होना है। इन विधेयकों को पास कराने के लिए सरकार को सदन में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। आज की वोटिंग यह तय करेगी कि आधी आबादी को उनका हक कब और किस स्वरूप में मिलेगा।



