
लंबे समय से अटके प्रमोशन मामले पर आखिरकार स्थिति साफ हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर चली बैठकों और मंथन के बाद अब वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के कॅरियर से जुड़ा अहम फैसला अंतिम चरण में पहुंच गया है।
छत्तीसगढ़ में आईपीएस अधिकारियों के प्रमोशन को लेकर गठित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) ने प्रमोशन प्रस्ताव को हरी झंडी (Chhattisgarh IPS DPC) दे दी है। डीपीसी की स्वीकृति के बाद फाइल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुमोदन के लिए भेजी गई है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही आदेश जारी किए जा सकते हैं, जिसे महज औपचारिक प्रक्रिया माना जा रहा है।
दरअसल, महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में जांच एजेंसी को पूछताछ की अनुमति दिए जाने के चलते तीन आईपीएस अधिकारियों के प्रमोशन पर पहले पेंच फंस गया था। इसी कारण डीपीसी की बैठक को बीच में रोकना पड़ा था। बाद में शासन से मार्गदर्शन लिया गया, लेकिन दूसरी बैठक में भी सहमति नहीं बन सकी। अंततः हालिया बैठक में प्रमोशन को लेकर सहमति बन गई।
हालांकि 2008 बैच की आईपीएस अधिकारी पारुल माथुर के मामले में स्थिति अलग रही। शराब घोटाले से जुड़े प्रकरण में उन्हें सरकार द्वारा चार्जशीट जारी की जा चुकी है और विभागीय जांच (Chhattisgarh IPS DPC) भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में जांच पूर्ण होने तक उनका प्रमोशन रोका गया है और वे फिलहाल आईजी नहीं बन पाएंगी।
बैच-वार प्रमोशन की स्थिति
2001 बैच (एडीजी पद):
डॉ. आनंद छाबड़ा — एकमात्र नाम
2008 बैच (आईजी पद):
पारुल माथुर (चार्जशीट, प्रमोशन रुका)
प्रशांत अग्रवाल
नीतू कमल (डेपुटेशन पर)
डी. श्रवण (डेपुटेशन पर)
मिलना कुर्रे
2012 बैच (डीआईजी पद):
आशुतोष सिंह (सीबीआई में प्रतिनियुक्त)
विवेक शुक्ला
रजनेश सिंह
शशिमोहन सिंह
राजेश कुकरेजा
श्वेता राजमणि
राजेश अग्रवाल
विजय अग्रवाल
रामकृष्ण साहू
2013 बैच (सेलेक्शन ग्रेड – एसएसपी):
जितेंद्र शुक्ला
मोहित गर्ग
अभिषेक पल्लव
भोजराम पटेल (वर्तमान में मुंगेली एसपी)
सेलेक्शन ग्रेड मिलने के बाद जिलों में पदस्थ एसपी का पदनाम एसएसपी में परिवर्तित (Chhattisgarh IPS DPC) हो जाएगा। पुलिस मुख्यालय स्तर पर इसे प्रशासनिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।



