बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने राजद में संगठनात्मक बदलाव की शुरूआत कर दी है। उन्होंने बिहार के राजद संगठन की सभी इकाईयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है अब वे नये सिरे से संगठन में पदाधिकारियों की नियुक्ति करेंगे। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में राजद का प्रदर्शन बेहद शर्मनाक रहा है। उसे सिर्फ पच्चीस सीटें ही मिल पाई थी। जिसके चलते तेजस्वी यादव ले दे कर नेता प्रतिपक्ष बन पाये हैं। यदि उनके खेमे का एक विधायक भी टूट जाता है तो वे नेता प्रतिपक्ष नहीं रह पाएंगे।
पार्टी में असंतोष भी उभरने लगा है और अब तो बांकीपूर सीट से प्रशांत किशोर के जीत जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का भी विधानसभा में तेज कम हो सकता है। प्रखर वक्ता और चर्चित चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के सामने विधानसभा में नव्वी पास तेजस्वी यादव कही नहीं टिक पाएंगे। ऐसे में उन्हें अब अपनी बची खुची पार्टी के कमजोर पडऩे का खतरा नजर आने लगा है। ऐसे में उन्हें अब संगठन की चिंता सता रही है और अब वे इसे मजबूत करने की कवायद में लग गये हैं। तेजस्वी यादव की पहले ही मुश्किलें बढ़ी हुई है। उनकी बहन राहिणी आचार्य पहले ही पार्टी से नाता तोड़ चुकी हैं।
वहीं उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव ने भी राष्ट्रीय जनता दल से किनारा करके अपनी अलग क्षेत्रीय पार्टी बना ली है। राष्ट्रीय जनता दल के संस्थापक लालू यादव उम्रदराज हो गये हैं और अस्वस्थ रहने लगे हैं। इस वजह से भी राजद पर लालू परिवार की पकड़ कमजोर पड़ती जा रही है। ऊपर से लालू प्रसाद यादव, राबड़ी, देवी, मीसा भारती और तेजस्वी यादव पर विभिन्न मुकदमों का सामना कर रहे हैं। ऐेसे में पार्टी को एकजुट रखना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
