छत्तीसगढ़

Elephant Calf Death Raigarh : तालाब में डूबने से हाथी के बच्चे की मौत, 11 माह में छह नवजात हाथियों ने गंवाई जान

रायगढ़ जिले में मानव-हाथी द्वंद्व के बीच वन्यजीव सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक और घटना सामने आई है। बंगुरसिया सर्किल के बड़झरिया गांव में तालाब में (Elephant Calf Death Raigarh) डूबने से छह माह के हाथी के बच्चे की मौत हो गई।

https://youtu.be/F9poNQALsdo

हादसे के बाद देर रात तक हाथियों का दल तालाब के आसपास डटा रहा और लगातार चिंघाड़ते हुए मृत बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश करता रहा। ग्रामीणों ने बताया कि शोर से आसपास के गांवों में दहशत फैल गई और लोग पूरी रात जागते रहे।

वन विभाग के अनुसार मृतक हाथी का बच्चा शुक्रवार शाम तालाब के पानी में उतरा था। संभावना है कि वह नहाने या पानी पीने नीचे गया होगा और गहराई में अचानक फिसलकर डूब गया। मौत के कुछ ही देर बाद हाथियों के झुंड ने तालाब क्षेत्र में जमकर आवाजें निकालीं, जिससे पूरा क्षेत्र गूंज उठा। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

हाथियों ने खुद बाहर निकाला शव

वन अधिकारियों ने बताया कि झुंड के हाथियों ने रातभर तालाब के इर्द-गिर्द मंडराते हुए मृत बच्चे को पहचानने की कोशिश की और अंततः (Elephant Calf Death Raigarh) शव को पानी से बाहर खींच लिया। तड़के सुबह तक हाथियों का दल आसपास बना रहा और फिर जंगल की ओर लौट गया। स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि हाथियों का व्यवहार बेहद भावुक और बेचैन करने वाला था।

2025 में लगातार छठा मामला

यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह जिला में वर्ष 2025 की 11 महीनों में हुई छठी नवजात हाथी मौत है। पिछले मामलों में करंट लगने, दलदल में धंसने और तालाब में डूबने की घटनाएं शामिल हैं। वन विभाग के रिकार्ड के अनुसार:

22 जनवरी – घरघोड़ा रेंज में दलदल में फंसकर मौत

18 मार्च – छाल रेंज में तालाब में डूबकर मौत

13 मई – घरघोड़ा रेंज में तालाब में डूबकर मौत

28 अक्टूबर – छाल रेंज में पानी में डूबकर मौत

25 नवंबर – तमनार रेंज में डूबकर मौत

19 दिसंबर – रायगढ़ रेंज में (Elephant Calf Death Raigarh) पानी में डूबकर मौत

लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाथी-मानव संघर्ष से बढ़ता खतरा

रायगढ़ क्षेत्र में वर्तमान में 30 से अधिक हाथियों का दल विचरण कर रहा है। लगातार बढ़ते संघर्ष, खेतों की तबाही, फसलों को नुकसान और बार-बार की मौतों से ग्रामीण चिंतित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जिले में हाथियों के प्राकृतिक मार्ग बाधित होने, आवास क्षेत्र सिमटने और जलस्रोतों की निगरानी नहीं होने से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।

वन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि जनसंख्या वृद्धि और अनियंत्रित विकास से हाथियों के मार्ग अवरुद्ध हो रहे हैं, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। ग्रामीण बार-बार शिकायत कर रहे हैं कि विभाग के पास ठोस रोकथाम योजना नहीं है। विभाग ने हालांकि दावा किया कि निगरानी बढ़ाई जा रही है और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों पर काम होना शुरू हो गया है।

https://youtu.be/fLvSO46iTsI

दहशत में ग्रामीण

रातभर चिंघाड़ते हाथियों की आवाज ने क्षेत्र में दहशत फैला दी। गांववालों का कहना है कि मृत बच्चे को देख हाथियों की बेचैनी दिल दहला देने वाली थी। कई ग्रामीण जंगल क्षेत्र में आवाजाही से डर रहे हैं। विभाग ने लोगों से तालाब और जंगल क्षेत्र (Elephant Calf Death Raigarh) से दूरी बनाए रखने की अपील की है।

मौत का सिलसिला क्यों जारी

हाथियों के प्राकृतिक जलस्रोत असुरक्षित

गहरे तालाबों की पहचान और सुरक्षा नहीं

हाथी गलियारों का अतिक्रमण

वन विभाग पर लापरवाही के आरोप

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