संपादकीय: स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
No-confidence motion against the Speaker
Editorial: संसद में बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती टकरार के कारण संसद का कामकाग लगातार बाधित होता रहा है। खासतौर पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोले से मना करने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तलवारें खींच गई हैं। राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब पर बोलने चाहते थे लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें इस पर बोलने की अनुमति नहीं दी।
इसके बाद से विपक्ष ने लोकसभा के भीतर और बाहर लगातार हंगामा किया और उस समय तो स्थिति और भी विकट हो गई जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बोलने से रोकने के लिए कांग्रेस की आठ महिला सांसदों ने अपने हाथों में एक बड़ा सा बैनर लेकर प्रधानमंत्री की कुर्सी को ही घेर लिया था।
इसके जवाब में सत्ता पक्ष की महिला सांसद भी आगे बढ़ी थी। लेकिन भाजपा सांसदों ने उन्हें रोक दिया। ताकि लोकसभा में अप्रिय स्थिति निर्मित न हो पाये। स्थिति को भांप कर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री मोदी को लोकसभा में आने से रोक दिया। बाद में स्पीकर ओम बिरला ने यह बयान दिया कि यदि वे प्रधानमंत्री को आने से नहीं रोकते तो लोकसभा में उनके साथ अनुचित व्यवहार हो सकता था और सदन की गरिमा को ठेंस लग सकती थी। स्पीकर के इस बयान के बाद विपक्ष ने अब स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है।
स्पीकर पर विपक्ष के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा के महासचिव को दिया है। इस नोटिस में कहा गया है कि स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संसद में बोलने नहीं दिया और इस तरह विपक्ष की आवाज को बंद करने की कोशिश की गई है। इसलिए विपक्ष संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे रहा है। यह बात अलग है कि इस अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में खुद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हस्ताक्षर नहीं किये हैं। विपक्ष के 118 सांसदों ने इस नोटिस में दस्तक किये हैं।
इस नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने हस्ताक्षर नहीं किये हैं। टीएमसी का कहना है कि जब वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते थे तब कांग्रेस ने उनका साथ नहीं दिया था। इसलिए अब वे भी इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं करेंगें। बहरहाल स्पीकर ओम बिरला ने जब तक नोटिस मामले का निपटारा नहीं हो जाता तब तक नैतिकता के आधार पर आसंदी पर बैठने से इंकार कर दिया है। देखना होगा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का क्या हश्र होता है।
