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NHRC Notice To CS And DGP : वेदांता पावर प्लांट हादसे पर दिल्ली में हलचल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने CS और DGP को थमाया नोटिस, 25 मौतों पर मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट की गूँज अब राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई (NHRC Notice To CS And DGP) दे रही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस पूरे मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को कड़ा नोटिस जारी किया है।

आयोग ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि मीडिया में आई खबरें सच हैं, तो यह सीधे तौर पर मासूम मजदूरों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने राज्य प्रशासन से अगले दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसमें अब तक की गई कार्रवाई, जांच की प्रगति और पीड़ित परिवारों को दिए गए मुआवजे का पूरा ब्यौरा मांगा गया है।

खौलती भाप ने ले ली 25 जानें, हादसे की खौफनाक हकीकत (NHRC Notice To CS And DGP)

यह हृदयविदारक घटना 14 अप्रैल को सिंघनातरई गांव में स्थित प्लांट की पहली यूनिट में हुई थी। हादसे के वक्त करीब 50 मजदूर वहां काम कर रहे थे, तभी अचानक बॉयलर फटने से करीब 600 डिग्री सेल्सियस तापमान वाली भाप का रिसाव हुआ। इस गर्म भाप की चपेट में आने से मजदूर बुरी तरह झुलस गए।

दर्दनाक खबर यह है कि इलाज के दौरान अब तक 25 मजदूरों की मौत (NHRC Notice To CS And DGP) हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक मजदूर अब भी अस्पतालों में संघर्ष कर रहे हैं। आयोग ने सरकार से इन घायलों के स्वास्थ्य की अद्यतन स्थिति और उन्हें मिल रहे इलाज की गुणवत्ता पर भी जवाब मांगा है।

चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 19 पर एफआईआर, प्रबंधन की लापरवाही उजागर

हादसे के बाद हुई शुरुआती जांच में प्लांट प्रबंधन की घोर लापरवाही (NHRC Notice To CS And DGP) की पुष्टि हुई है। पुलिस ने इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत कुल 19 जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई और इतने उच्च तापमान वाले क्षेत्र में मजदूरों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे।

मुआवजे और सरकारी जांच का घेरा, 30 दिन में आएगी रिपोर्ट

इस मामले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए बिलासपुर संभागायुक्त को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है, जिन्हें 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। मुआवजे की बात करें तो प्लांट प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये और नौकरी देने का वादा किया है, जबकि सरकार और पीएमओ की ओर से भी आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है।

मानवाधिकार आयोग अब इस बात की बारीकी से निगरानी कर रहा है कि क्या ये वादे केवल कागजों पर हैं या वास्तव में पीड़ितों तक राहत पहुँच (NHRC Notice To CS And DGP) रही है। केंद्र सरकार की तकनीकी टीमें भी मौके पर पहुँचकर बॉयलर फटने के तकनीकी कारणों की जांच कर रही हैं।

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