Women Dairy Business : महिलाएं डेयरी व्यवसाय से बन रहीं आत्मनिर्भर, बस्तर में आय के नए अवसर

बस्तर संभाग में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में डेयरी व्यवसाय को एक मजबूत आजीविका साधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से कांकेर और कोण्डागांव जिले में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से पायलट परियोजना संचालित की जा रही है, जिसके तहत जनजातीय महिलाओं को डेयरी व्यवसाय (Women Dairy Business) से जोड़ा जा रहा है।
इस योजना का शुभारंभ 01 जून 2025 को कोण्डागांव जिले के भोंगापाल गांव से किया गया था। योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग के कोण्डागांव एवं कांकेर जिले में 125 हितग्राहियों को ऋण एवं अनुदान के माध्यम से दुधारू पशु प्रदाय का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 47 महिलाओं के आवेदन पर बैंक द्वारा ऋण स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है, जिनमें से 24 महिलाओं को 36 दुधारू पशु वितरित किए गए हैं।
हितग्राहियों को उच्च गुणवत्ता की दुधारू गाय उपलब्ध कराने के लिए एनडीडीबी डेयरी सर्विसेस द्वारा साहीवाल नस्ल की गायें चिन्हित कर वितरित की जा रही हैं। इन गायों की प्रतिदिन दूध उत्पादन क्षमता 8 से 10 लीटर तक है, जिससे महिलाओं को डेयरी व्यवसाय (Women Dairy Business) के माध्यम से नियमित आय प्राप्त हो रही है।
वर्तमान में दुग्ध महासंघ द्वारा बस्तर संभाग की 95 कार्यशील दुग्ध समितियों के माध्यम से 4006 दुग्ध प्रदायकों से प्रतिदिन 15060 लीटर दूध का संकलन किया जा रहा है। इसमें से लगभग 8000 लीटर दूध कांकेर, कोण्डागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में विपणन किया जा रहा है।
सहकारिता को और मजबूत करने के उद्देश्य से आगामी पांच वर्षों में 400 नए ग्रामों को दुग्ध समितियों से जोड़ा जाएगा, जिससे लगभग 9000 नए दुग्ध प्रदायक जुड़ेंगे और प्रतिदिन 48 हजार लीटर दूध संकलन का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। इसके अतिरिक्त बस्तर जिले में 28 हजार लीटर क्षमता के दुग्ध शीतलीकरण केंद्रों तथा 1 लाख लीटर क्षमता के नवीन दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना की जाएगी।
योजना के अंतर्गत दो दुधारू पशुओं की कुल लागत 1.40 लाख रुपये निर्धारित है, जिसमें 50 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में, 40 प्रतिशत बैंक ऋण तथा 10 प्रतिशत राशि हितग्राही द्वारा वहन की जाती है। ऋण सुविधा को सरल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के बीच समझौता किया गया है।
एक अनुसूचित जनजाति महिला हितग्राही प्रतिदिन औसतन 12 लीटर दूध दुग्ध समिति को प्रदाय कर रही है, जिससे उसे प्रतिमाह लगभग 13 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त हो रही है। यह पहल बस्तर संभाग में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और डेयरी व्यवसाय (Women Dairy Business) के माध्यम से स्थायी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।



