नक्सलियों ने की आपरेशन रोकने और शांति वार्ता की पेशकश, गृहमंत्री शर्मा बोले, शर्तों पर नहींं कोई बात, इधर कांग्रेस ने प्रस्ताव का किया समर्थन

बीजापुर। (Home Minister Amit Shah) गृह मंत्री अमित शाह के 2026 तक पूरे देश को नक्सल मुक्त करने के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा जारी नक्सल विरोधी अभियानों के चलते नक्सल संगठन ने अब सरकार से ऑपरेशन रोकने और शांति वार्ता की अपील की है। तेलूगु भाषा में जारी पर्चें में नक्सलियों ने कुछ शर्तें रखे हैं।
यप्रेस नोट सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने जारी किया है। इसके जरिए नक्सलियों ने शांति वार्ता की मांग की है। उन्होंने भारत सरकार से ‘ऑपरेशन कगारÓ को रोकने का आग्रह किया गया है। उनका दावा है कि, इस ऑपरेशन के नाम पर आदिवासी समुदायों के खिलाफ काफी हिंसा हुई है। वे सुरक्षा बलों की वापसी और आतंकवाद विरोधी अभियानों को रोकने की मांग करते हैं।
शांति वार्ता के लिए ये प्रमुख शर्तें भी
- युद्ध विराम और शांति वार्ता की अपील
सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति ने मध्य भारत में युद्ध को तत्काल रोकने का आह्वान किया है। वे शांति वार्ता को सुगम बनाने के लिए भारत सरकार और सीपीआई (माओवादी) दोनों से बिना शर्त युद्ध विराम की मांग करते हैं।
2- सरकार का माओवादी विरोधी अभियान (ÓकागरÓ ऑपरेशन) भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर माओवादी-प्रभावित क्षेत्रों को लक्षित करते हुए ‘कागरÓ नामक एक गहन आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया।इस अभियान के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर हिंसा, हत्याएं और सामूहिक गिरफ्तारियां हुई हैं।
3-हताहतों की संख्या और मानवाधिकार उल्लंघन : 400 से अधिक माओवादी नेता, कार्यकर्ता और आदिवासी नागरिक कथित तौर पर मारे गए हैं। महिला माओवादियों को कथित तौर पर सामूहिक यौन हिंसा और फांसी का सामना करना पड़ा है। कई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है और उन्हें अवैध हिरासत और यातना दी गई है। - शांति वार्ता के लिए माओवादियों की शर्तें: प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों से सुरक्षा बलों की तत्काल वापसी। नई सैन्य तैनाती का अंत। आतंकवाद विरोधी अभियानों का निलंबन।
- सरकार के खिलाफ आरोप : सरकार पर क्रांतिकारी आंदोलनों को दबाने के लिए आदिवासी समुदायों के खिलाफ नरसंहार युद्ध छेडऩे का आरोप है।
नागरिक क्षेत्रों में सैन्य बलों के उपयोग को असंवैधानिक बताया जाता है। - सीपीआई (माओवादी) ने जनता से समर्थन मांगा : माओवादियों ने बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार संगठनों, पत्रकारों, छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं से शांति वार्ता के लिए सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह किया। वार्ता के लिए गति बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने का अनुरोध किया गया।
- शांति वार्ता के लिए माओवादियों की तत्परता : अगर सरकार उनकी पूर्व शर्तों पर सहमत होती है तो वे बातचीत में शामिल होने की इच्छा व्यक्त करते हैं। सीपीआई (माओवादी) ने कहा कि जैसे ही सरकार सैन्य अभियान बंद करेगी, वे युद्ध विराम की घोषणा करेंगे। (नक्सलियों ने तेलगु भाषा में प्रेस नोट जारी किया है, जिसे हिन्दी में कनवर्ट किया गया है)
राज्य सरकारें नक्सलियों का नरसंहार बंद करे
हमारा प्रस्ताव है कि केंद्र और राज्य सरकारें छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र (गढ़चिरौली), ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में कगार के नाम पर नरसंहार, नरसंहार (नरसंहार) को रोकें और नए सशस्त्र बलों के शिविरों की स्थापना को रोकें। यदि केंद्र और राज्य सरकारें इन प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देती हैं, तो हम तुरंत युद्धविराम की घोषणा कर देंगे।
सरकार 100 फीसदी बातचीत के लिए तैयार लेकिन शर्तों पर नहीं होगी : विजय शर्मा
रायपुर। गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, सरकार 100 फीसदी बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन शर्तों के आधार पर कोई चर्चा नहीं होगी। राज्य और केंद्र सरकार एक गोली भी नहीं चलाना चाहती है। नक्सलियों ने प्रेस नोट पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, इस पत्र के परीक्षण करने की आवश्यकता है। पहले भी पत्र जारी किए थे, लेकिन पहले के पत्र में बहुत सारी डिमांड थी। नक्सली युद्ध विराम की बात कर रहे है, तो मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि, राज्य और केंद्र सरकार एक गोली भी नहीं चलाना चाहती है। इसलिए उनके लिए नई पुनर्वास नीति भी लाई गई है। नक्सली सरेंडर नीति का लाभ लेकर सरेंडर करें।
बातचीत के बाद ही रुकेंगे ऑपरेशन
नक्सलियों के बातचीत कर उन्होंने कहा कि, सरकार 100 फीसदी बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन शर्तों के आधार पर कोई चर्चा नहीं होगी। बातचीत के लिए कोई चैनल उनके तरफ से बनें। जब बातचीत होगी तो ऑपरेशन रुकेंगे, अन्यथा फोर्स की कार्यवाही जारी रहेगी। बातचीत से कोई परिणाम निकलता है तो यह सभी की लिए खुशी की बात है। लेकिन अब सरकार की ओर से कोई समिति नहीं बनाई जाएगी। अब वार्ता के लिए पहल नक्सलियों की तरफ से हो। हम वाट्सअप कॉल से भी बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन सरकार घुटने टेककर बातचीत नहीं करेगी।
नक्सली शांति वार्ता के लिए तैयार हैं तो इस पर विचार करे सरकार : दीपक बैज
रायपुर। नक्सलियों के शांति वार्ता के पत्र पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार को विचार करने की बात कही है। बैज ने कहा, शांति वार्ता के लिए नक्सलियों की ओर से ठोस निर्णय आया है तो इस पर विचार करनी चाहिए. किस स्थिति पर शांति वार्ता करना चाहते हैं, शांति वार्ता का मकसद क्या है, बस्तर की शांति के लिए क्या बेहतर हो सकता है, इस पर सरकार क्या सोचती है, यह निर्णय सरकार को करनी चाहिए. कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार अपनी वाहवाही लूटने के लिए प्रोपेगेंडा कर रही।
