छत्तीसगढ़

Naxalite Mass Surrender Appeal : लाल सलाम का अंत…! नक्सली डालेंगे हथियार, 3 राज्यों के सीएम को लिखा पत्र

देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे निर्णायक अभियान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी (MMC जोन) के नक्सलियों ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साय को एक लेटर भेजकर सामूहिक सरेंडर (Naxalite Mass Surrender Appeal) करने की इच्छा जताई है।

https://youtu.be/tUzm8Sd72wo

पत्र में नक्सलियों ने लिखा है कि वे अपने दो वरिष्ठ साथियों महाराष्ट्र में आत्मसमर्पण करने वाले भूपति और छत्तीसगढ़ में सरेंडर करने वाले सतीश के नक्शेकदम पर चलना चाहते हैं। MMC जोन के सभी नक्सली एक साथ हथियार डालने (Mass Surrender Demand) की तैयारी में हैं।

Naxalite Mass Surrender Appeal
Naxalite Mass Surrender Appeal

पत्र में उन्होंने 15 फरवरी 2026 तक की डेडलाइन मांगी है ताकि आपस में बातचीत कर सकें। नक्सलियों का कहना है कि इस अवधि तक सुरक्षा बल कोई बड़ा ऑपरेशन (Naxalite Mass Surrender Appeal) न चलाए। माओवादियों ने मुख्यमंत्रियों से यह मांग भी की है कि कुछ दिनों के लिए मीडिया न्यूज नेटवर्क बंद कर दिया जाए, जिससे संगठन के भीतर संवाद सुरक्षित तरीके से हो सके।

यह चिट्ठी महाराष्ट्र–मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़ (MMC जोन) के जंगल क्षेत्रों से भेजी गई है, जहां पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा बलों ने लगातार सफल ऑपरेशन चलाए हैं। नक्सलियों ने पत्र में लिखा है कि इस बार वे अपना सालाना PLGA सप्ताह (Naxalite Mass Surrender Appeal) भी नहीं मनाएंगे। यह पहला मौका है जब MMC जोन के नक्सलियों ने सार्वजनिक रूप से लिखित रूप में सरेंडर की इच्छा जताई है।

https://youtu.be/SVNH2r7ztAM

नक्सलियों ने सुरक्षा बलों से एक और गुजारिश की है PLGA वीक के दौरान जो वार्षिक अभियान उनके खिलाफ चलाए जाते हैं, उन्हें इस बार स्थगित कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही एक और पत्र भेजकर मास सरेंडर की तारीख की घोषणा करेंगे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सली–मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में 15 फरवरी 2026 तक की नक्सलियों की डेडलाइन इस लक्ष्य के भीतर ही आती है। अगर तीनों राज्य सरकारें इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती हैं और यह सामूहिक सरेंडर सफल होता है, तो नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की यह अब तक की सबसे बड़ी जीत होगी।

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