Naxal Violence Free Village Scheme : नक्सल हिंसा छोड़ने पर गांव को 1 करोड़, जनपद को 10 लाख और जिला पंचायत सदस्य को 15 लाख की सौगात
Naxal Violence Free Village Scheme
बस्तर के अति संवेदनशील इलाकों में विकास की रफ्तार तेज करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा और निर्णायक (Naxal Violence Free Village Scheme) संदेश दिया है। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने सुकमा जिले के जगरगुंडा पहुंचकर स्पष्ट किया कि जो गांव स्वयं को सशस्त्र नक्सल हिंसा से मुक्त घोषित करेंगे, उन्हें एक करोड़ रुपये की अतिरिक्त विकास राशि दी जाएगी। इसके साथ ही संबंधित जनपद पंचायत सदस्य को 10 लाख और जिला पंचायत सदस्य को 15 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि क्षेत्रीय विकास कार्यों के लिए प्रदान की जाएगी।
जगरगुंडा में आयोजित बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री ने पारंपरिक समाज प्रमुखों—गायता, सिरहा, पुजारी, बैगा—और जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया। समाज प्रमुखों ने बताया कि हिंसा के दौर में गांवों तक सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकीं, क्योंकि नक्सली गतिविधियों के कारण विकास कार्य पूरे ही नहीं हो पाते थे। इस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह दौर खत्म हो रहा है और सुकमा को हिंसा नहीं, विकास से पहचाना जाएगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन ऐसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस कर रहा है, जहां माओवादी गतिविधियों के कारण विकास बाधित रहा। इन्हीं इलाकों के लिए नियद नेल्ला नार योजना लागू की गई है। इसके तहत स्थापित सुरक्षा कैंप अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने वाले सुविधा केंद्र के रूप में काम कर रहे हैं। कई दुर्गम गांवों में अब सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाएं पहुंच चुकी हैं।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जो गांव अपने भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाकर खुद को हिंसा मुक्त घोषित करेंगे, उन्हें सरकार विशेष प्रोत्साहन देगी। यह राशि गांवों में बुनियादी ढांचे, आजीविका, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में सीधे खर्च की जा सकेगी।
बस्तर में आजीविका के नए मॉडल पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण केवल वनोपज संग्राहक नहीं रहेंगे, बल्कि गांवों में ही प्रोसेसिंग यूनिट के माध्यम से व्यवसायी बनेंगे। इससे वनोपज का उचित मूल्य मिलेगा और प्रसंस्करण के जरिए ग्रामीणों की आय चार से पांच गुना तक बढ़ सकेगी।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सामग्री वितरण भी किया गया। किसानों को उन्नत किस्म के मूंग और उड़द के बीज, 50 किसानों को टमाटर और बैंगन के पौधे, 17 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किए गए। इसके अलावा स्व-सहायता समूहों को पावर वीडर, रिवॉल्विंग फंड, सीआईएफ राशि और बैंक लिंकेज के तहत आर्थिक सहायता दी गई।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी पहल करते हुए नियद नेल्ला नार योजना के तहत मिशन दृष्टि के अंतर्गत मोतियाबिंद पीड़ितों के लिए विशेष बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जिससे 40 मरीजों को जिला अस्पताल में उपचार मिलेगा। वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पीएचसी बुरड़ी, गगनपल्ली और किस्टाराम को एनक्यूएएस प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
उपमुख्यमंत्री ने समाज प्रमुखों से अपील की कि वे जंगलों में भटक रहे युवाओं को पुनर्वास नीति का लाभ लेने और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें, ताकि बस्तर में स्थायी शांति और समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।
