National Education Policy 2020 : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से भारतीय ज्ञान परम्परा को नया आयाम
National Education Policy 2020
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान प्रणाली के एकीकरण पर केंद्रित “एक समग्र शैक्षिक परिकल्पना” विषयक दो दिवसीय कार्यशाला (National Education Policy 2020) का शुभारंभ आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, रायपुर में किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा (उच्च शिक्षा मंत्री) एवं कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने संयुक्त रूप से किया।
भारतीय ज्ञान परम्परा अतीत नहीं, भविष्य की राह दिखाने वाली – टंकराम वर्मा
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय सभ्यता और संस्कृति की महान विरासत को सुदृढ़ करने वाली नीति है। यह केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र एवं संतुलित शैली प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, महाभारत, आयुर्वेद, योग, गणित, दर्शन, ज्योतिष और खगोल शास्त्र (भारतीय ज्ञान परम्परा) हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। गुरुकुल परम्परा में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिकता और समाज सेवा (शिक्षा का उद्देश्य) था।
मंत्री ने कहा कि आधुनिक समय में भारतीय ज्ञान परम्परा को पुनः शिक्षा व्यवस्था में आत्मसात करने की आवश्यकता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इसी दिशा में सशक्त कदम है। यह नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 विकसित भारत के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।
आधुनिकता और संस्कृति का संतुलन ही नई पीढ़ी का मार्ग – गुरु खुशवंत साहेब
कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 आने वाली पीढ़ी को आधुनिक तकनीकी ज्ञान के साथ भारतीय इतिहास और संस्कृति (भारतीय संस्कृति) से जोड़ती है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि शिक्षा व्यवस्था व्यवहारिक, रोजगारोन्मुख और संस्कारयुक्त (व्यावहारिक शिक्षा) बने। यह नीति भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का गहन अध्ययन और सामूहिक प्रयास आवश्यक – डॉ. अतुल कोठारी
विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (नई दिल्ली) डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का गहन अध्ययन कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन समय की मांग है। सभी शिक्षाविदों को मिलकर इस नीति को धरातल पर उतारने के लिए सामूहिक प्रयास (नीति क्रियान्वयन) करने होंगे।
शिक्षाविदों और कुलपतियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम (National Education Policy 2020) में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल, आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग डॉ. संतोष कुमार देवांगन, शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेई, पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के कुलपति डॉ. अरुण अरोरा सहित राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नोडल अधिकारी, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि एवं प्रदेशभर के महाविद्यालयों के प्राचार्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि कार्यशाला में भारतीय ज्ञान परम्परा, योग, आयुर्वेद, वेद, उपनिषद, गणित, दर्शन, खगोल शास्त्र, साहित्य और कला जैसी विधाओं पर गहन चर्चा हुई। इसके माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने और विद्यार्थियों को समग्र और व्यावहारिक शिक्षा (समग्र शिक्षा) देने का प्रयास किया जा रहा है।
