छत्तीसगढ़

Narayanpur Maoist Killing : तिरंगे की कीमत…नारायणपुर में माओवादी ‘जन अदालत’ ने ली युवक की जान…

Narayanpur Maoist Killing : स्वतंत्रता दिवस पर माओवादी स्मारक पर तिरंगा फहराने की हिम्मत दिखाने वाले युवक मनेश नरेटी की माओवादियों ने निर्मम हत्या कर दी। यह घटना 18 अगस्त को बिनागुंडा गांव में हुई, जिसने पूरे इलाके में दहशत और खामोशी फैला दी है।

मनेश को गांव की पंचायत ने स्कूल में पढ़ाने की जिम्मेदारी दी थी। 15 अगस्त को उन्होंने साहस दिखाते हुए माओवादियों के स्मारक पर तिरंगा फहराया और अन्य युवाओं को भी देशप्रेम के इस कार्य में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। माओवादियों को यह देशभक्ति नागवार गुज़री। उन्होंने मनेश को पकड़कर तथाकथित जन अदालत में पेश किया और ग्रामीणों के सामने मौत की सजा(Narayanpur Maoist Killing) सुनाकर उनकी हत्या कर दी।

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माओवादी पोस्टरों में धमकी

19 अगस्त को माओवादियों ने इंद्रपुर गांव में पोस्टर और बैनर लगाकर इस हत्या की जिम्मेदारी ली। साथ ही कोंगे पंचायत के सरपंच रामजी धुर्वा और डीआरजी से जुड़े कई लोगों को मौत की धमकी दी। उन पर मुखबिरी का आरोप लगाते हुए कहा गया कि 16 अप्रैल 2024 को बिनागुंडा मुठभेड़ में 29 नक्सलियों की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं।

विकास के पक्षधर थे मनेश

ग्रामीण बताते हैं कि मनेश गांव में विकास कार्यों को लेकर सक्रिय थे और माओवादी हिंसा(Narayanpur Maoist Killing) में कमी आने से उत्साहित थे। वे युवाओं को शिक्षा और प्रगति की राह में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। यही सकारात्मक पहल उनके लिए जानलेवा साबित हुई।

छोटेबेठिया थाना प्रभारी रमन उसेंडी ने बताया कि सितरम नदी में बाढ़ की वजह से पुलिस अभी गांव तक नहीं पहुंच सकी है। वहीं, मनेश के परिवार ने अब तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

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डर और खामोशी का माहौल

इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ा है, बल्कि पूरे इलाके में खामोशी और डर का साया गहरा कर दिया है। ग्रामीण खुलकर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या आज भी तिरंगा फहराना कई इलाकों में “जुर्म” माना जाएगा?

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