देश

Myra Ceremony : मायरा की मिसाल – जायल में मामा ने रिश्तों की शान पर लुटाया 1.61 करोड़, परंपरा ने रचा नया इतिहास

राजस्थान की धरती पर परंपराएं केवल निभाई नहीं जातीं, वे वक्त के साथ नई ऊंचाइयों को छूती भी हैं। जायल में सदियों से चली आ रही ‘मायरा’ रस्म ने एक बार फिर यही साबित (Myra Ceremony) कर दिया। यहां दो भाइयों ने अपनी बहन के बेटे की शादी में ऐसा मायरा दिया, जिसकी चर्चा अब पूरे अंचल में हो रही हैकुल 1 करोड़ 61 लाख रुपये का पारंपरिक उपहार।

https://www.youtube.com/watch?v=1U3kAw8Y1n0

जयल के माहेश्वरी भवन में हुए इस समारोह में ललित कुमार व्यास और ओमप्रकाश व्यास ने अपनी बहन गायत्री देवी के बेटे नीलेश व्यास की शादी पर मायरा अर्पित किया। पिता श्यामसुंदर व्यास की मौजूदगी में यह परंपरा पूरे सम्मान और रीति-रिवाजों के साथ निभाई गई।

मायरे में 81 लाख रुपये नकद, 25 तोला सोना, चांदी के आभूषण, पारंपरिक वस्त्र और उपयोगी उपहार शामिल रहे। समारोह के दौरान लोकगीतों की गूंज और पारिवारिक उल्लास ने माहौल को भावनाओं (Myra Ceremony) से भर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्राह्मण समाज में इस स्तर का मायरा पहले कम ही देखने को मिला है, और यही वजह है कि यह आयोजन खास चर्चा में है।

जयल–खियाला क्षेत्र में मायरा केवल आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि मामा–भांजे के रिश्ते की गरिमा का सार्वजनिक उत्सव माना जाता है। इसी परंपरा से जुड़े गीत “जयल खियाला रो मायरो”महिलाएं आज भी पूरे उत्साह से गाती हैं। पहले बड़े मायरे अधिकतर जाट समुदाय में सुर्खियां बनते थे, लेकिन अब दूसरे समाजों में भी यह परंपरा नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है।

https://www.youtube.com/watch?v=1bFFxSdcjOc

पिछले कुछ वर्षों में नागौर जिले में करोड़ों के मायरे सामने (Myra Ceremony) आए हैंकहीं जमीन, कहीं नकद और कहीं सोना-चांदी। हाल में 21 करोड़ रुपये से अधिक के मायरे की चर्चा भी रही, लेकिन मौजूदा आयोजन ने अपनी सांस्कृतिक सादगी और पारिवारिक भावनाओं के कारण अलग पहचान बनाई है।

इस ऐतिहासिक मायरे ने यह साफ कर दिया कि राजस्थान में रिश्तों की ताकत अभी भी परंपराओं से जुड़ी है  – यहां रस्में सिर्फ निभाई नहीं जातीं, जिंदगी में उतारी जाती हैं।

Related Articles

Back to top button