MSME Export Incentive Scheme : एमएसएमई निर्यातकों को ब्याज पर छूट, बिना गिरवी भी मिलेगा लोन
MSME Export Incentive Scheme
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन से जुड़ी निर्यात प्रोत्साहन स्कीम के तहत केंद्र सरकार ने नए साल में एमएसएमई निर्यातकों (MSME Export Incentive Scheme) के लिए दो महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं।
इन दोनों योजनाओं का संचालन वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय और वित्त मंत्रालय की देखरेख में किया जाएगा। स्कीम के अनुसार निर्यातकों को शिपमेंट से पहले और शिपमेंट के बाद लिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर छूट दी जाएगी, साथ ही बिना गिरवी लोन की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
पहली योजना के तहत एमएसएमई निर्यातकों को लोन की ब्याज दरों पर अधिकतम 2.75 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। इसके लिए सरकार ने 5,181 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह ब्याज छूट केवल सरकार द्वारा अधिसूचित उत्पादों के निर्यात पर ही लागू होगी।
वाणिज्य विभाग के अनुसार, संबंधित उत्पादों की सूची जल्द जारी की जाएगी। फिलहाल इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है, जिसमें रक्षा क्षेत्र से जुड़े उत्पादों का निर्यात करने वाले एमएसएमई निर्यातकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
स्कीम (MSME Export Incentive Scheme) के तहत निर्यातकों को प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट दोनों प्रकार के कर्ज पर ब्याज में राहत मिलेगी। सरकार का उद्देश्य निर्यात योग्य वस्तुओं की निर्माण लागत को कम करना है, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अन्य देशों के उत्पादों के साथ बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकें। इससे एमएसएमई सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती मिलने की उम्मीद है।
दूसरी योजना (MSME Export Incentive Scheme) के अंतर्गत सरकार एमएसएमई निर्यातकों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज की गारंटी देगी। माइक्रो और स्मॉल निर्यातकों के लिए सरकार 85 प्रतिशत तक कर्ज की गारंटी लेगी, जबकि मीडियम श्रेणी के निर्यातकों के लिए यह गारंटी 65 प्रतिशत तक होगी।
एक वित्त वर्ष में एक निर्यातक को अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ही सरकारी गारंटी मिलेगी। इस योजना के लिए सरकार ने 2,114 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे। दोनों योजनाओं का लाभ मुख्य रूप से रोजगारपरक क्षेत्रों से जुड़े निर्यातकों को दिया जाएगा।
निर्यात प्रोत्साहन के लिए 25 हजार करोड़ का इंसेंटिव
गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर में सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को मंजूरी दी थी। इसके तहत वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक निर्यात प्रोत्साहन के लिए कुल 25,000 करोड़ रुपये के इंसेंटिव दिए जाएंगे। सरकार का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए वस्तु निर्यात में वृद्धि आवश्यक है। इससे देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
