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Motorcycle Sales India : भारत का दोपहिया वाहन उद्योग अगले वित्त वर्ष में 7 – 9% बढ़ेगा, बिक्री 2.9 करोड़ यूनिट तक पहुंचने का अनुमान: क्रिसिल

भारत के दोपहिया वाहन उद्योग के लिए आने वाला वित्त वर्ष सकारात्मक रहने (Motorcycle Sales India) की उम्मीद है। क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026–27 में इस सेक्टर में 7 से 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा सकती है और कुल बिक्री करीब 2.9 करोड़ यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू बाजार इस वृद्धि का प्रमुख आधार बना रहेगा, जबकि निर्यात में लगातार तीसरे वर्ष घरेलू बिक्री की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहिया वाहनों की बढ़ती बिक्री से ऑटो कंपनियों के राजस्व में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिल सकती है। खासतौर पर प्रीमियम मोटरसाइकिल और ज्यादा क्षमता वाले मॉडल की बढ़ती मांग कंपनियों की आय को मजबूती दे रही है। यह विश्लेषण देश की छह प्रमुख कंपनियों के उत्पादन पर आधारित है, जो कुल दोपहिया वाहन उत्पादन में लगभग 95 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं। घरेलू बाजार अभी भी उद्योग की रीढ़ बना हुआ है, जो कुल बिक्री का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि निर्यात का योगदान करीब 20 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष में शुरुआती छह महीनों के दौरान मांग कमजोर रहने से बिक्री में खास बढ़ोतरी (Motorcycle Sales India) नहीं हुई थी, लेकिन जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के बाद वाहनों की कीमतों में 7 से 8 प्रतिशत तक कमी आई, जिससे सितंबर के बाद बिक्री में सुधार दर्ज किया गया। अच्छी खरीफ फसल और किसानों की आय बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में मांग मजबूत हुई है, जबकि शहरी बाजार में भी जीएसटी दरों में बदलाव के कारण मांग में तेजी आई है।

बाजार में 125 सीसी तक की एंट्री-लेवल मोटरसाइकिलों का दबदबा बना हुआ है, जिनकी हिस्सेदारी लगभग 73 प्रतिशत है। हालांकि, धीरे-धीरे ग्राहकों का रुझान 150 से 350 सीसी की ज्यादा क्षमता वाली मोटरसाइकिलों की ओर बढ़ रहा है। इस सेगमेंट की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025 में 23 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके अलावा, प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद आयात शुल्क कम होने और ग्राहकों की बदलती पसंद के कारण 500 सीसी से ज्यादा क्षमता वाली मोटरसाइकिलों की मांग में भी संभावनाएं बन सकती हैं।

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रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आयातित प्रीमियम मोटरसाइकिलों से घरेलू उद्योग को ज्यादा खतरा नहीं है, क्योंकि भारतीय कंपनियां मुख्य रूप से एंट्री-लेवल और किफायती सेगमेंट (Motorcycle Sales India) पर केंद्रित हैं, जहां उनकी बाजार हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। कुल मिलाकर, बेहतर ग्रामीण आय, घटती कीमतें और बढ़ते निर्यात के कारण आने वाले वित्त वर्ष में भारत का दोपहिया वाहन उद्योग मजबूत वृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है।

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