छत्तीसगढ़

हाथों की ताकत, देश की तरक्की, ऊर्जा सुरक्षा के नायक खनिक: दुहन

Miners are the heroes of the strength of their hands: दुनिया में व्याप्त उर्जा संकट को दृष्टिगत रखते हुए एस ईसीएल ने प्रधानमंत्री कार्यालय से मिले निर्देशानुसार काफी पहले से ही तैयारी करना प्रारंभ कर दिया था उसी का परिणाम है कि देश में कही भी बिजली का संकट नहीं है, कोयला उत्पादन को दस प्रतिशत तक बढ़ा लिया गया है और बढ़ रही उत्पादन लागत की परवाह किए बिना जनता पर बिना कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले हमारे खनिक देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विकास कर रहे है। खनिको का समर्पण इस आपदा में काबिले तारीफ है और आज श्रम दिवस पर उन सारे श्रमिक साथियों का अभिनंदन करना चाहता हूँ। हम देश की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, और कर्तव्य पालन हेतु प्रतिबध्द हैं। उक्त बातें एसईसीएल के सीएमडी श्री हरीश दुहन ने नवप्रदेश की टीम के साथ विशेष साक्षात्कार के दौरान कही।
उन्होंने खनिको के लिए किए जा रहे कल्याण कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि हम न केवल कार्यक्षेत्र मे ही श्रमिक का ध्यान रख रहे हैं बल्कि उनके घर परिवार और बच्चों को भी अपने साथ जोड़ा है, क्योंकि हमारा मानना है कि यदि खनिक का परिवार खुश है तो उसकी कार्यक्षमता ज्यादा बढ़ जाती है।

उन्होंने बताया कि बच्चों को उच्च तकनीकी शिक्षा, उनकी रुचि के अनुसार शिक्षकीय क्षमता में वृध्दि, एआई के बारे में विस्तृत ज्ञान, तथा स्कूलों मेें स्वचछता, अच्छा वातावरण निर्माण में भी हम बहुत काम कर रहे हैं। खनिक परिवारों की गृहिणियों के लिए खेल और सास्ंकृतिक महोत्सव का आयोजन किया जाता हैं जिसमें इन परिवारों की महिलाएं पारम्परिक भारतीय खेल, संगीत, गायन, वादन, के साथ साथ कुकिंग, तथा उनके छिपे हुए कला कौशल की शानदार अभिव्यक्ति प्रस्तुत करती हैं, यह सारे कार्यक्रम महिलाओं द्वारा गठित श्रध्दा महिला समिति के संयोजन में किए जा रहे हैं।

कंपनी सीएसआर के तहत बिलासपुर के जिला प्रशासन और स्थानीय नेताओं की बेहद प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि शासन प्रशासन के सहयोग से हम एक बेहद महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व का निर्वहन करने जा रहे हैं जिसके अन्तर्गत लगभग पांच एकड क्षेत्र मे समाज के ऐसे बुजुर्गो के लिए आस्थाश्रम बनाया जाएगा जो अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं उन्होने बताया की छोटे परिवार होने के कारण अधिकांश परिवारों के पढ़े लिखे बच्चे नौकरी की वजह से बाहर चले जाते हैं और उनके अभिभावक अकेले रह जाते हैं आस्थाश्रम में ऐसे परिवारों को सर्वसुविधा युक्त आवास के साथ सभी तरह सुविधाएं उपल्बध कराई जाएंगी और उनको एक नए सिरे से जिंदगी जीने का अवसर प्रदान किया जाएगा, इसके अलावा बिलासपुर के स्कूलों में स्मार्ट क्लासेस चलाने, स्किल डेवलपमेंट के कार्यक्रम करने, प्लास्टिक को एकत्र कर रिसाईक्लींग करने, जंकफूड से हो रहे नुकसान से बच्चों को बचाने, दिव्यांग सहायता करने के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

उन्होंने क्षेत्र के अस्पतालों मे हाईजिन मेंटेन करने के लिए अनेक मशीने तथा शहर सफाई के लिए स्वीपिंग मशीने भी उपलब्ध कराये जाने की जानकारी दी।

देश-दुनिया के वर्तमान हालात के मद्देनजऱ कोयला एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत बनकर उभरा है। आप इसे कैसे देखते हैं?
-आज वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितताएं बढ़ी हैं। ऐसे समय में भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा केवल एक आर्थिक विषय नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। भारत की लगभग 70 प्रतिशत बिजली आज भी कोयले पर आधारित है, जो यह स्पष्ट करता है कि कोयला हमारी ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ है। जब हम वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखते हैं—विशेषकर हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और ऊर्जा संकटों को—तो यह और स्पष्ट हो जाता है कि विश्वसनीय और स्थिर ऊर्जा स्रोतों का होना कितना आवश्यक है। कोयला इस दृष्टि से सबसे भरोसेमंद स्रोत के रूप में उभरा है। एसईसीएल और कोल इंडिया की पूरी टीम 24 घंटे 7 दिन इस दिशा में कार्यरत है कि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति बिना किसी बाधा के होती रहे। लेकिन इस पूरी व्यवस्था की असली ताकत हमारे खनिक हैं। वे हर परिस्थिति—चाहे वह मौसम की चुनौती हो या कार्य की कठिनता—में निरंतर काम करते हुए देश को ऊर्जा प्रदान करने का दायित्व निभा रहे हैं। वास्तव में, वे देश की ऊर्जा सुरक्षा के सच्चे प्रहरी हैं।

हाल ही में समाप्त वित्तीय वर्ष 2025-26 के नतीजों को आप कैसे देखते हैं?
-वित्तीय वर्ष 2025-26 एसईसीएल के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। हमने कोल इंडिया की सहायक कंपनियों में एकमात्र कंपनी के रूप में उत्पादन, प्रेषण और ओवरबर्डन निष्कासन—तीनों प्रमुख मानकों में एक साथ सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है, जो हमारी समग्र कार्यक्षमता को दर्शाता है। हमने 176.2 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.26 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार, 178.6 मिलियन टन प्रेषण के साथ 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ओवरबर्डन निष्कासन के क्षेत्र में भी हमने 364.3 मिलियन क्यूबिक मीटर का अब तक का सर्वोच्च स्तर हासिल किया। इसके अतिरिक्त, रेल और एफएमसी (स्नद्बह्म्ह्यह्ल रूद्बद्यद्ग ष्टशठ्ठठ्ठद्गष्ह्लद्ब1द्बह्ल4) के माध्यम से कोयला प्रेषण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे लॉजिस्टिक्स की दक्षता में सुधार आया है। ये सभी उपलब्धियां इस बात का संकेत हैं कि एसईसीएल केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है।

इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण क्या रहा?
-किसी भी संगठन की सफलता उसके लोगों पर निर्भर करती है, और एसईसीएल के संदर्भ में यह पूरी तरह सत्य है। हमारे खनिकों, इंजीनियरों, प्रबंधकों और पूरे कार्यबल ने जिस समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया है, वही इस सफलता की आधारशिला है। इसके साथ ही, हमारी टीम ने भूमि अधिग्रहण के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की है। वित्तीय वर्ष के दौरान 358 हेक्टेयर भूमि अर्जित की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 867 प्रतिशत अधिक है। यह उपलब्धि भविष्य की परियोजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और उत्पादन वृद्धि की निरंतरता सुनिश्चित करती है। हमने तकनीकी नवाचार, बेहतर योजना, पारदर्शी प्रक्रियाओं और टीम वर्क पर विशेष ध्यान दिया, जिसके परिणामस्वरूप यह समग्र सफलता संभव हो सकी।
आज महिलाएं भी खनन क्षेत्र में आगे आ रही हैं। इस दिशा में एसईसीएल की क्या पहलें हैं?

-खनन क्षेत्र पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान रहा है, लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल
रही है। एसईसीएल इस बदलाव का सक्रिय भागीदार है और महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने कोयला उद्योग में पहली बार पूर्णत: महिला संचालित औषधालय और महिला संचालित केंद्रीय भंडार इकाई स्थापित की है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। इसके साथ ही, ‘प्रोजेक्ट धरा शक्तिÓ के माध्यम से हम उन महिलाओं को, जो भू-स्वामियों या आश्रितों के रूप में कंपनी में शामिल हो रही हैं, कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप ऑपरेशनल और तकनीकी क्षेत्रों में कार्य करने के लिए तैयार किया जा रहा है। यह पहल केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और तकनीकी दक्षता विकसित करने का एक व्यापक प्रयास है, जो भविष्य में उद्योग के स्वरूप को भी बदलने में सहायक होगा।

खनिकों के कल्याण और सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
-खनिकों की सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आज खनन कार्य काफी हद तक मशीनीकृत हो चुका है, जिससे न केवल उत्पादकता बढ़ी है, बल्कि कार्यस्थल की सुरक्षा भी बेहतर हुई है। ओपनकास्ट खदानों में सरफेस माइनर और भूमिगत खदानों में कंटीन्यूअस माइनर जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जोखिम कम हुआ है। इसके अतिरिक्त, कोल इंडिया द्वाराकॉर्पोरेट सैलरी पैकेजलागू किया गया है, जिसके तहत नियमित कर्मचारियों को 1 करोड़ और संविदा श्रमिकों को 40 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवरेज प्रदान किया जा रहा है। इस योजना में लाखों कर्मचारी शामिल हो चुके हैं और महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए कर्मचारियों को कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता। साथ ही, खदान दुर्घटना में मृत्यु की स्थिति में अनुग्रह राशि 15 लाख से बढ़ाकर 25 लाख कर दी गई है, जो सीधे आश्रितों को प्रदान की जाती है। यह दर्शाता है कि हम अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा और सम्मान के प्रति कितने प्रतिबद्ध हैं।
दवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को रोजगार देना एक संवेदनशील विषय है। इस दिशा में क्या प्रयास हुए हैं?

यह विषय हमारे लिए केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। हम समझते हैं कि किसी कर्मचारी के निधन के बाद उसके परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है। इस दिशा में हमारी एचआर टीम ने अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। पिछले वित्तीय वर्ष में एसईसीएल द्वारा 511 आश्रितों को रोजगार प्रदान किया गया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है और पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। हमारा प्रयास केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रक्रिया को तेज और संवेदनशील बनाना भी है। उदाहरण के तौर पर, एक मामले में मात्र 18 दिनों के भीतर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई—यह हमारे सिस्टम की दक्षता और मानवीय दृष्टिकोण दोनों को दर्शाता है।
पर्यावरण और सतत विकास के क्षेत्र में एसईसीएल की क्या प्राथमिकताएं हैं?

हम यह भली-भांति समझते हैं कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में एसईसीएल लगातार ठोस कदम उठा रहा है। पिछले वर्ष हमने 13.96 लाख पौधरोपण कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया और मियावाकी पद्धति के माध्यम से सघन वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया। इसके साथ ही, 43.78 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित कर लगभग 41,200 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई गई। खदान जल के पुन: उपयोग के माध्यम से 3800 हेक्टेयर से अधिक भूमि में सिंचाई सुनिश्चित की गई, जो जल संरक्षण और सामुदायिक लाभ दोनों का उत्कृष्ट उदाहरण है। हमारा लक्ष्य है कि खनन गतिविधियों को पर्यावरणीय रूप से अधिक जिम्मेदार और टिकाऊ बनाया जाए।

भविष्य के लिए आपकी क्या प्राथमिकताएं हैं?
-भविष्य की दृष्टि से हम तकनीकी नवाचार, पारदर्शिता और ऊर्जा विविधीकरण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। ‘डिजीकोलÓ जैसी डिजिटल पहल के माध्यम से हमने रियल टाइम मॉनिटरिंग और पारदर्शिता को सुदृढ़ किया है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। इसके अलावा, हम कोयला गैसीकरण, उच्च दक्षता ऊर्जा उत्पादन, कोयला धुलाई, महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और जल आधारित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रहे हैं। हमारा उद्देश्य केवल वर्तमान की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा ढांचा तैयार करना है।

माइनर्स डे के अवसर पर आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
-माइनर्स डे हमारे लिए केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि उन सभी खनिकों के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है, जो अपने परिश्रम और समर्पण से देश को ऊर्जा प्रदान करते हैं। मैं सभी खनिकों को इस अवसर पर हृदय से शुभकामनाएं देता हूं। आप ही वह शक्ति हैं, जो देश के हर घर को रोशन करती है और उद्योगों को गतिशील बनाए रखती है। एसईसीएल परिवार को आप पर गर्व है, और हमें विश्वास है कि आपके सहयोग और समर्पण से हम भविष्य में भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे और देश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत बनाएंगे।

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