Middle East Tension Impact : मिडिल ईस्ट तनाव का असर, सेंसेक्स 1500 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी में भी बड़ी गिरावट
Middle East Tension Impact
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई (Middle East Tension Impact) दिया। बुधवार को बाजार खुलते ही भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता के कारण बाजार की होली फीकी पड़ गई।
सुबह करीब 9:19 बजे बीएसई सेंसेक्स 1539.33 अंक टूटकर 78,699.52 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी 468.25 अंक की भारी गिरावट के साथ 24,397.45 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों में बढ़ते तनाव और निवेशकों की सतर्कता के चलते बाजार में शुरुआती कारोबार से ही दबाव देखने को मिला।
शुरुआती कारोबार में निफ्टी के कई प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इनमें लार्सन एंड टूब्रो, इंटरग्लोब एविएशन, श्रीराम फाइनेंस, अदानी पोर्ट्स एंड एसईजेड और बजाज फाइनेंस प्रमुख (Middle East Tension Impact) रहे। वहीं कुछ शेयरों में हल्की बढ़त भी देखने को मिली, जिनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, इंफोसिस, तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी), कोल इंडिया और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज शामिल रहे।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। मीडिया, रियल्टी, मेटल, पीएसयू बैंक, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी लगभग 1.5 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित (Middle East Tension Impact) किया है। इसी कारण भारतीय शेयर बाजार में भी बिकवाली का दबाव बढ़ा है और आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और बीमा लागत बढ़ने लगी है। इससे कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है और तेल की कीमतों में तेजी आने की आशंका है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।
इस बीच भारतीय मुद्रा पर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 92.17 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है।
